रेड बुल ने 'एनर्जी ड्रिंक' लेबल हटाने के FSSAI के आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में दी चुनौती

दिल्ली हाईकोर्ट में रेड बुल ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के आदेश के खिलाफ कानूनी याचिका दायर की है। इस मामले में, जिसे रेड बुल बनाम भारत संघ (Red Bull Vs UoI) नाम दिया गया है, न्यायमूर्ति अमित महाजन ने 28 सितंबर 2026 को सुनवाई की। अदालत ने नियामक प्राधिकरण से सवाल किया कि क्या आदेश जारी करने से पहले रेड बुल को कोई पूर्व कारण बताओ नोटिस दिया गया था या सुनवाई का अवसर मिला था। मामले की पूरी जानकारी ANI News के माध्यम से सामने आई है।
कोर्ट की सुनवाई और FSSAI का निर्देश
कार्यवाही के दौरान अदालत ने उस तात्कालिकता पर स्पष्टीकरण मांगा जिसके कारण बिना पूर्व परामर्श के यह आदेश जारी किया गया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता को कोई अंतरिम सुरक्षा नहीं दी गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को तय की गई है। रेड बुल, जो 2002 से भारत में अपने उत्पादों को एनर्जी ड्रिंक के रूप में बेच रहा है, का तर्क है कि यह निर्देश उचित प्रक्रिया का उल्लंघन करता है। कंपनी का दावा है कि यह मार्च 2024 की FSSAI एडवाइजरी के विपरीत है, जो इस डिस्क्रिप्टर के इस्तेमाल की अनुमति देती थी।
नियामक बदलाव और अन्य ब्रांड्स पर प्रभाव
FSSAI के 1 जुलाई 2026 के आदेश के तहत कंपनियों को अनुपालन के लिए 90 दिन का समय दिया गया था। इस आदेश में कहा गया है कि 'एनर्जी ड्रिंक' उसके मानकों के तहत मान्यता प्राप्त श्रेणी नहीं है। इसके बजाय, ऐसे उत्पादों को 'कैफीनेटेड पेय पदार्थ' के रूप में लेबल किया जाना जरूरी है, जिसमें प्रति लीटर 145 मिलीग्राम से 300 मिलीग्राम कैफीन होना चाहिए। FSSAI ने 'शरीर और मन को स्फूर्तिवान बनाता है' जैसे मार्केटिंग दावों को भी संभावित रूप से भ्रामक बताया है। इस बदलाव से स्टिंग, पेप्सिको के एड्रेनालाईन रश, रिलायंस के कैम्पा गोल्ड बूस्ट, हेल एनर्जी और मॉन्स्टर जैसे कई ब्रांड प्रभावित हुए हैं। भारतीय पेय संघ (Indian Beverage Association) ने FSSAI से इन नियमों पर अधिक विचार-विमर्श और जोखिम-आधारित दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया है।