नोएडा के पारंपरिक सेक्टरों से बाहर निकल रहे डेवलपर्स, इन नए रेजिडेंशियल हब पर बढ़ा फोकस
नोएडा के पारंपरिक सेक्टरों से आगे बढ़कर अब डेवलपर्स यमुना एक्सप्रेसवे और सिद्धार्थ विहार जैसे नए इलाकों में निवेश कर रहे हैं।

NCR के रियल एस्टेट मार्केट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब बड़े डेवलपर्स नोएडा के पुराने और पारंपरिक सेक्टरों को छोड़कर नए उभरते हुए रेजिडेंशियल कॉरिडोर की ओर रुख कर रहे हैं। नोएडा एक्सप्रेसवे का दक्षिणी हिस्सा, यमुना एक्सप्रेसवे और NH-24 पर स्थित सिद्धार्थ विहार अब निवेशकों और घर खरीदारों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।
मार्केट डेटा के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही में NCR की कुल रेजिडेंशियल सेल में नोएडा की हिस्सेदारी 36% रही है। साथ ही, यहां प्रॉपर्टी की वैल्यू में सालाना 7.1% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ANAROCK की रिपोर्ट बताती है कि भारत के टॉप सात शहरों में NCR ने 13% की सालाना कीमत वृद्धि के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और एयरपोर्ट ने बदली तस्वीर
इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा हाथ बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और बढ़ते कमर्शियल हब का है। नोएडा एक्सप्रेसवे अब टेक कंपनियों और कॉर्पोरेट कैंपस का मुख्य केंद्र बन चुका है, जिसकी वजह से सेक्टर 150 और 151 जैसे रेजिडेंशियल नोड्स की मांग तेजी से बढ़ी है।
सबसे महत्वपूर्ण मोड़ जून 2026 में आया, जब नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट शुरू हुआ और 15 जून को इंडिगो की पहली कमर्शियल फ्लाइट ने उड़ान भरी। इस विकास ने यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास की जमीनों की वैल्यू बढ़ा दी है। इसी कड़ी में यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) ने अक्टूबर 2026 में सेक्टर 17, 18, 20 और 22D में ग्रुप हाउसिंग प्लॉट स्कीम लॉन्च की है, जिसकी आवेदन समय सीमा 26 अक्टूबर तक है।
दूसरी तरफ, सिद्धार्थ विहार कॉरिडोर में भी भारी निवेश हो रहा है। AU रियल Estate ने मई 2026 में 5.6 एकड़ जमीन खरीदी और अब वहां 1,200 करोड़ रुपये के नए प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। हिंडन बैराज के जरिए सिद्धार्थ विहार-वसुंधरा रूट के दोबारा खुलने से यहां कनेक्टिविटी और बेहतर होगी।
इतना ही नहीं, नोएडा अथॉरिटी अब 'न्यू नोएडा' (DNGIR) प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, जो करीब 20,000 हेक्टेयर में फैला होगा। इस महत्वाकांक्षी योजना का लक्ष्य 2030 तक करीब 6 लाख रोजगार के अवसर पैदा करना है। आंकड़ों की बात करें तो 2019 से 2026 के बीच इस क्षेत्र में रेजिडेंशियल कीमतों में 125% का उछाल आया है, जिससे औसत कीमत 10,780 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गई है।