दिल्ली: 'राष्ट्र साधना के सौ वर्ष' काव्य सत्र में गूंजी RSS की शताब्दी यात्रा की गाथा
इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती ने RSS के शताब्दी वर्ष और महर्षि वाल्मीकि जयंती पर दिल्ली में विशेष काव्य सत्र का आयोजन किया।

नई दिल्ली के भास्करাচার্য कॉलेज ऑफ एप्लाइड साइंसेज में एक विशेष काव्य सत्र का आयोजन किया गया, जिसका शीर्षक 'राष्ट्र साधना के सौ वर्ष' रखा गया। इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के नैऋत्य केंद्र द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष और महर्षि वाल्मीकि की जयंती को समर्पित करना था। इस दौरान कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से संघ की 100 वर्षों की यात्रा और समाज निर्माण में उसके योगदान को शब्दों में पिरोया।
कार्यक्रम में कवियों ने डॉ. केशव बलीराम हेडगेवार के जीवन और उनके विजन से लेकर दूसरे सरसंघचालक 'गुरुजी' के नेतृत्व तक की महत्वपूर्ण कड़ियों को उजागर किया। कविताओं के जरिए दैनिक शाखा के महत्व, भगवा ध्वज की परंपरा और प्रचारकों के निस्वार्थ समर्पण को रेखांकित किया गया। इसके अलावा, विभाजन की त्रासदी, प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य, आपातकाल के विरुद्ध संघर्ष और ग्रामीण विकास जैसे विषयों पर भी भावपूर्ण कविताएं पढ़ी गईं। सामाजिक समरसता, गौ संरक्षण और पर्यावरण बचाओ जैसे संदेशों ने श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया।
साहित्य और समाज का गहरा नाता
दिल्ली राज्य अध्यक्ष विनोद बब्बर ने इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए कहा कि महर्षि वाल्मीकि संस्कृत साहित्य के पुरोधा हैं और उनकी अमर कृति रामायण भारतीय साहित्य का एक अनमोल खजाना है, जो आज भी मानवीय मूल्यों और करुणा की प्रेरणा देता है। उन्होंने RSS के शताब्दी वर्ष को अनगिनत स्वयंसेवकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया, जिन्होंने समाज को जगाने और संगठित करने का कार्य किया।
बब्बर ने अखिल भारतीय साहित्य परिषद की छह दशकों की यात्रा का जिक्र करते हुए भारतीय भाषाओं और साहित्य के संवर्धन पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे साहित्य से जुड़ें, क्योंकि यह सामाजिक एकजुटता का सबसे सशक्त माध्यम है। वहीं, द्वारका नगर के संघचालक प्रदीप देसवाल ने एक विशेष कविता के माध्यम से संघ की स्थापना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को सबके सामने रखा।