ओखला बर्ड सेंचुरी में दिखा दुर्लभ व्हाइट स्टॉर्क, बर्डवॉचर्स के बीच मची खलबली
दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर स्थित ओखला बर्ड सेंचुरी में दुर्लभ व्हाइट स्टॉर्क देखा गया है, जिससे पक्षी प्रेमियों में भारी उत्साह है।

दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर स्थित ओखला बर्ड सेंचुरी में इन दिनों एक खास मेहमान की मौजूदगी ने प्रकृति प्रेमियों और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स को उत्साहित कर दिया है। यहाँ एक बेहद दुर्लभ 'व्हाइट स्टॉर्क' (Ciconia ciconia) देखा गया है। इस दुर्लभ पक्षी की पहली झलक 1 नवंबर 2026 को बर्डवॉचर डॉ. तेजस्विनी सूर्या ने देखी थी, जिसके बाद यह लगातार तीन दिनों तक सेंचुरी के वेटलैंड्स में नजर आया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पक्षी 'Ciconia ciconia asiatica' उपप्रजाति का हो सकता है, जो मुख्य रूप से उज्बेकिस्तान और दक्षिणी कजाकिस्तान जैसे मध्य एशियाई क्षेत्रों में प्रजनन करते हैं। पूरी दुनिया में इनकी संख्या 2,000 से भी कम बची है। ये पक्षी आमतौर पर ईरान के रास्ते होते हुए सर्दियों में भारतीय उपमहाद्वीप की ओर प्रवास करते हैं।
तीन दशकों में केवल पांचवीं बार दिखा यह मेहमान
सफेद पंख, काले उड़ान पंख और लाल चोंच व पैरों वाला यह पक्षी मुख्य रूप से कीड़े-मकोड़े, मछलियां, उभयचर और छोटे स्तनधारियों को अपना आहार बनाता है। हालांकि IUCN की रेड लिस्ट में इसे 'Least Concern' की श्रेणी में रखा गया है, लेकिन दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में इसका दिखना बेहद असामान्य है।
रिकॉर्ड्स के मुताबिक, पिछले 30 सालों में यह पक्षी इस इलाके में सिर्फ चार बार देखा गया है। पहली बार मार्च 1992 में ओखला बर्ड सेंचुरी में, फिर 2004-05 में पलवल में, फरवरी 2005 में दोबारा ओखला में और आखिरी बार मार्च 2019 में जेवर के पास इसे देखा गया था।
इस दुर्लभ नजारे पर वन्यजीव फोटोग्राफर निखिल देवासर ने इसे बर्डिंग कम्युनिटी के लिए एक बड़ा पल बताया है। वहीं, पक्षी प्रेमी रोहित शर्मा का कहना है कि इस तरह के मेहमानों का आना यह साबित करता है कि शहरी इलाकों में वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) को बचाए रखना कितना जरूरी है।