दिल्ली में 1996 से सारंगी की धुन छेड़ रहे रामपाल, संगीत से पाला परिवार

Kittu Kumari6 October 20261 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली में 1996 से सारंगी की धुन छेड़ रहे रामपाल, संगीत से पाला परिवार

दिल्ली की भागदौड़ भरी जिंदगी और शोर-शराबे के बीच एक ऐसी आवाज है जो हमें हमारी जड़ों और परंपराओं की याद दिलाती है। यह कहानी है रामपाल की, जो पिछले करीब तीन दशकों से दिल्ली में सारंगी बजाकर न केवल इस पारंपरिक वाद्य यंत्र की विरासत को जीवित रखे हुए हैं, बल्कि इसी संगीत के दम पर उन्होंने अपने परिवार की जिम्मेदारियां भी पूरी की हैं।

साल 1996 से दिल्ली में अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे रामपाल के लिए सारंगी सिर्फ एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि उनके जीवन का आधार है। उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से अपने चार बच्चों का पालन-पोषण किया और उनकी शादियां भी इसी संगीत से होने वाली कमाई के जरिए संपन्न कराईं।

50 पैसे से शुरू हुआ था संघर्ष का सफर

रामपाल का यह सफर आसान नहीं था। जब उन्होंने शुरुआत की थी, तब हालात बेहद चुनौतीपूर्ण थे। उन्होंने याद करते हुए बताया कि एक दौर ऐसा भी था जब उन्हें अपनी कला के बदले महज 50 पैसे मिलते थे। आर्थिक तंगी और संघर्षों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और सारंगी के प्रति अपना समर्पण बनाए रखा।

शहर बदल गया, लोग बदल गए और संगीत सुनने के तरीके भी बदल गए, लेकिन रामपाल की सारंगी की धुन आज भी दिल्ली की फिजाओं में गूंज रही है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि कैसे एक कलाकार अपनी पारंपरिक कला के जरिए कठिन परिस्थितियों में भी खुद को और अपने परिवार को संवार सकता है।

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