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राज्यसभा स्टडी: दिल्ली-NCR प्रदूषण में पराली से ज्यादा केमिकल्स और ट्रांसपोर्ट जिम्मेदार

Kittu Kumari1 August 20262 min read23 views
राज्यसभा स्टडी: दिल्ली-NCR प्रदूषण में पराली से ज्यादा केमिकल्स और ट्रांसपोर्ट जिम्मेदार

दिल्ली-NCR के प्रदूषण को लेकर राज्यसभा में एक नई स्टडी सामने आई है। 1 अगस्त 2026 को सामने आई इस रिसर्च के अनुसार, दिल्ली-NCR के एयर पॉल्यूशन में केमिकल्स का योगदान 25 प्रतिशत है। इस स्टडी में बताया गया है कि सर्दियों के मौसम में पराली जलाने की तुलना में सेकेंडरी पार्टिकुलेट मैटर और ट्रांसपोर्ट एमिशन यानी गाड़ियों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण के बहुत बड़े कारण हैं। केंद्र सरकार ने 31 जुलाई 2026 को राज्यसभा को यह जानकारी दी थी कि पराली जलाना ही दिल्ली-NCR में विंटर स्मॉग का एकमात्र कारण नहीं है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए PIB Press Release देख सकते हैं।

सर्दियों और गर्मियों में प्रदूषण के मुख्य कारण

स्टडी के मुताबिक, सर्दियों के दौरान सेकेंडरी पार्टिकुलेट मैटर और गाड़ियों का धुआं दिल्ली-NCR के एयर पॉल्यूशन का मुख्य कारण होता है। वहीं, गर्मियों के मौसम में डस्ट यानी धूल प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है, जो कुल PM2.5 कंसंट्रेशन का 25 से 31 प्रतिशत हिस्सा बनता है। इसके बाद गर्मियों में ट्रांसपोर्ट (18-21%), सेकेंडरी पार्टिकुलेट्स (16-19%), बायोमास बर्निंग (11-14%) और इंडस्ट्रियल एमिशन (9-15%) का नंबर आता है। इस बीच, CAQM (Commission for Air Quality Management in NCR and Adjoining Areas) ने दिल्ली-NCR की इंडस्ट्रीज के लिए रिवाइज्ड पार्टिकुलेट मैटर (PM) एमिशन स्टैंडर्ड्स लागू करने की समयसीमा 1 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी है।

पुरानी रिपोर्ट्स और अन्य खुलासे

यह नई फाइंडिंग्स पहले की रिपोर्ट्स से मेल खाती हैं। दिसंबर 2025 की Centre for Science and Environment (CSE) की एक स्टडी में भी यह बताया गया था कि दिल्ली की जहरीली हवा के लिए ट्रैफिक और स्थानीय कारक मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं, जबकि पराली जलाने का योगदान 5 प्रतिशत से भी कम था। इसके अलावा, दिसंबर 2025 में Central Pollution Control Board (CPCB) के एक RTI जवाब में बताया गया था कि उस सर्दी के दौरान दिल्ली के PM 2.5 प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान सिर्फ 3.6 प्रतिशत था। International Council on Clean Transportation (ICCT) की एक अन्य स्टडी के अनुसार, 2024 में भारत में ट्रांसपोर्ट पॉल्यूशन की वजह से 90,000 समय पूर्व मौतें और 15,300 बच्चों में अस्थमा के मामले सामने आए, जिसमें दिल्ली-NCR में सबसे ज्यादा एक्सपोजर देखा गया। प्रदूषण से निपटने की रणनीति बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने 29 दिसंबर 2025 को एक हाई-लेवल एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया था।

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