पेपर लीक दशकों पुरानी समस्या, राज्यसभा उपसभापति हरिवंश ने NEET-UG विरोध और सुधारों पर रखी बात

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने हाल ही में पेपर लीक के दशकों पुराने संकट पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इसे एक ऐसी व्यवस्थागत चुनौती बताया है जो पिछले कई दशकों से चली आ रही है। छात्रों की नाराजगी को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले महीने नई दिल्ली में प्रदर्शनकारियों से बातचीत करके संवेदनशीलता दिखाई और उनकी कई मुख्य मांगों को मान लिया (Source: ANI)। राज्यसभा उपसभापति ने माना कि पेपर लीक की समस्या दशकों पुरानी है और सरकार ने प्रदर्शनकारियों की मांगें स्वीकार की हैं।
- पेपर लीक एक दशकों पुरानी व्यवस्थागत चुनौती है।
- सरकार ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की मांगें मानीं।
- NEET-UG विरोध प्रदर्शनों में अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल पर चिंता जताई गई।
- परीक्षा धोखाधड़ी रोकने के लिए नया कानून और टास्क फोर्स का गठन हुआ है।
प्रदर्शनों की भाषा और लोकतांत्रिक अधिकार
हरिवंश ने इस बात पर जोर दिया कि विरोध प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन चर्चा के दौरान शालीनता बनी रहनी चाहिए। उन्होंने NEET-UG परीक्षा की अनियमितताओं के खिलाफ हुए हालिया प्रदर्शनों के दौरान अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल पर अपनी चिंता व्यक्त की (Source: ANI)। विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन हालिया प्रदर्शनों में अमर्यादित भाषा के प्रयोग पर चिंता जताई गई है।
सरकार द्वारा उठाए गए सुधार और जांच
इस संकट से निपटने के लिए सरकार ने परीक्षा में धोखाधड़ी पर सख्त सजा देने हेतु 'Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024' लागू किया है। इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स राष्ट्रीय परीक्षा ढांचे को फिर से तैयार कर रही है ताकि एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन और डिजिटल वितरण मॉडल का उपयोग किया जा सके। इस बीच, Central Bureau of Investigation (CBI) 2026 के NEET-UG लीक की जांच कर रही है और संस्थागत विश्वास बहाल करने के लिए प्रशासन के काम के तहत अब तक 13 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर चुकी है (Source: PTI)। परीक्षा सुधारों के तहत नया कानून लागू किया गया है और CBI 2026 NEET-UG लीक की जांच कर रही है।