दिल्ली-NCR में रेलवे ट्रैक ट्रेसपासिंग के मामले दोगुने, जन विश्वास एक्ट का दिखा असर

जन विश्वास एक्ट के बाद दिल्ली-NCR में रेलवे ट्रैक पार करने वालों पर सख्ती बढ़ी है, केस दोगुने हुए और जुर्माना भी बढ़ा।

Kittu Kumari23 October 20262 min read0 viewsNCR
दिल्ली-NCR में रेलवे ट्रैक ट्रेसपासिंग के मामले दोगुने, जन विश्वास एक्ट का दिखा असर

दिल्ली और आसपास के इलाकों में रेलवे ट्रैक पार करने यानी ट्रेसपासिंग के मामलों में भारी उछाल देखा गया है। रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, इस साल ट्रैक पार करने वालों की संख्या पिछले साल के मुकाबले दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है। यह बदलाव खास तौर पर जन विश्वास एक्ट लागू होने के बाद देखने को मिला है, जिससे अब नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्ती बढ़ गई है।

RPF द्वारा 10 सितंबर 2026 तक जारी किए गए रिकॉर्ड के अनुसार, इस साल अब तक 6,379 लोगों को ट्रैक पार करते हुए पकड़ा गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या केवल 3,147 थी। जुर्माने की वसूली में भी बड़ी बढ़ोतरी हुई है; जहां 2025 में लगभग 14 लाख रुपये जुर्माना वसूला गया था, वहीं 2026 में यह बढ़कर 31 लाख रुपये तक पहुंच गया है।

जन विश्वास एक्ट ने बदला जुर्माना वसूलने का तरीका

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अधिकारियों का मानना है कि इस बढ़ोतरी के पीछे 19 जून 2026 को दिल्ली डिवीजन में लागू हुआ जन विश्वास एक्ट एक बड़ी वजह है। इस कानून के आने से रेलवे एक्ट, 1989 की धारा 147 के तहत उल्लंघन करने वालों के लिए एक तय जुर्माना निर्धारित कर दिया गया है। अब दोषियों को न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे जुर्माना वसूलने की प्रक्रिया तेज और आसान हो गई है। इस एक्ट के लागू होने के बाद से ही अब तक 4,084 लोगों को पकड़ा गया है और उनसे 20.4 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया है।

रेलवे प्रशासन ने दिल्ली-NCR में 10 ऐसे इलाकों की पहचान की है जहां ट्रेसपासिंग सबसे ज्यादा होती है। इनमें मंगोलपुरी-मुंडका-शकूर बस्ती का इलाका, बिजवासन-गुड़गांव सेक्शन, आदर्श नगर और बदली से दिल्ली आजादपुर स्टेशनों के बीच का क्षेत्र शामिल है।

ट्रेसपासिंग की इस समस्या के पीछे कई कारण बताए गए हैं। पटरियों के किनारे बसी घनी बस्तियां और झुग्गियां, बाउंड्री वॉल या फेंसिंग की कमी, ओवरब्रिज की अनुपलब्धता और लोगों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता की कमी जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि ट्रैक पर मिलने वाले शवों की संख्या में कमी आई है। 10 सितंबर 2026 तक 1,406 शव बरामद हुए हैं, जबकि पिछले साल इसी समय तक यह संख्या 2,160 थी।

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