'तिरंगा नहीं हटाऊंगा': बीकानेर हाउस में प्रदर्शन की तस्वीरें हटाने पर भड़के रायहन वाड्रा

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे रायहन वाड्रा की एक आर्ट प्रदर्शनी दिल्ली के बीकानेर हाउस में विवादों के घेरे में आ गई है। रायहन का आरोप है कि प्रदर्शनी के उद्घाटन से ठीक पहले मैनेजमेंट ने उन्हें उनके कई आर्टवर्क्स हटाने के लिए मजबूर किया। रायहन वाड्रा बीकानेर हाउस में अपनी प्रदर्शनी 'नो आइडिया इज फाइनल' के जरिए युवाओं के विरोध प्रदर्शनों और अन्य आंदोलनों को तस्वीरों के माध्यम से दिखा रहे थे, लेकिन प्रबंधन ने इस कंटेंट को 'आपत्तिजनक' बताकर हटाने को कहा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए रायहन ने लिखा कि मैनेजमेंट ने उनसे उन तस्वीरों को हटाने को कहा जो दिल्ली में युवाओं के विरोध प्रदर्शनों को दर्शाती थीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें तिरंगे की दो तस्वीरें हटाने का निर्देश दिया गया था, जिसे उन्होंने साफ तौर पर खारिज कर दिया। रायहन ने कड़े शब्दों में कहा, "मैं भारतीय ध्वज की तस्वीर नहीं हटाऊंगा।" उन्होंने संकेत दिया कि फिलहाल शो का कुछ हिस्सा ही चलेगा और जरूरत पड़ी तो वह इन सभी तस्वीरों के लिए कोई दूसरा स्थान ढूंढ लेंगे।
कांग्रेस ने लगाया सेंसरशिप का आरोप
इस मामले ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और एआईसीसी के मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक साधारण आर्ट शो में इस तरह की सेंसरशिप क्यों की जा रही है। खेड़ा ने कहा कि जब तिरंगा भी सेंसर की कैंची से सुरक्षित नहीं है, तो समस्या कला में नहीं बल्कि शासन की सोच में है। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनी की लगभग आधी तस्वीरें (74 आर्टवर्क्स) सिर्फ इसलिए हटा दी गईं क्योंकि वे 'राजनीतिक' थीं, जबकि उनमें कुछ भी अपमानजनक या भड़काऊ नहीं था।
वहीं, कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी बीकानेर हाउस के प्रशासन के व्यवहार को बेहद 'अजीब' और 'अशिष्ट' बताया। इसके अलावा, इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के लीगल सेल ने भी अपना समर्थन जताते हुए कहा कि आप फ्रेम को सेंसर कर सकते हैं, लेकिन सच को नहीं। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि सरकार विचारों और विरोध प्रदर्शनों की तस्वीरों से इतना डर गई है कि अब राष्ट्रीय ध्वज तक चिंता का विषय बन गया है।