चुनाव आयोग के खिलाफ मार्च: राहुल और प्रियंका गांधी समेत 260 हिरासत में, दिल्ली पुलिस ने कहा- नहीं थी अनुमति

देश की राजधानी दिल्ली में मंगलवार को उस वक्त भारी हंगामा हो गया जब विपक्षी गठबंधन INDIA के नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इस दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा समेत करीब 260 लोगों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने और स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए की गई।
पूरी घटना तब शुरू हुई जब INDIA गठबंधन के नेताओं ने संसद भवन से निर्वाचन सदन (चुनाव आयोग मुख्यालय) तक मार्च निकालने की योजना बनाई थी। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इस मार्च के लिए डीसीपी ऑफिस में कोई आवेदन नहीं दिया गया था और न ही इसकी कोई आधिकारिक अनुमति ली गई थी। जब प्रदर्शनकारी आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंचे और वहां धरने पर बैठ गए, तो पुलिस ने उन्हें वहां से हटने की चेतावनी दी। हालांकि, राहुल गांधी और अन्य नेताओं ने साफ कर दिया कि जब तक सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल को चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिलने का समय नहीं मिलता, वे वहां से नहीं हटेंगे।
'लोकतंत्र बचाओ' अभियान के तहत प्रदर्शन
विपक्षी दलों का यह विरोध प्रदर्शन उनके 'लोकतंत्र बचाओ' अभियान का हिस्सा है। यह पूरा विवाद स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया और फॉर्म 6 में किए गए बदलावों को लेकर है। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पर अपना कड़ा रुख जाहिर करते हुए कहा कि वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं। उन्होंने इसे 'वोट चोरों' से लोकतंत्र बचाने की लड़ाई करार दिया।
प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष आकाशवाणी भवन परिसर के भीतर अपना विरोध जारी रखेगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर दिल्ली पुलिस को इस प्रदर्शन से परेशानी है, तो उन्हें कोई वैकल्पिक जगह बतानी चाहिए।
पुलिस ने बताया कि बार-बार मना करने के बावजूद जब प्रदर्शनकारी नहीं हटे, तो सुरक्षा बलों ने कार्रवाई करते हुए 10 सांसदों समेत कुल 260 लोगों को हिरासत में ले लिया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित सभी नेताओं को किंग्सवे कैंप स्थित न्यू पुलिस लाइन्स ले जाया गया, जहां से बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।
गौरतलब है कि यह विवाद तब और गहरा गया जब एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान दो चुनाव आयुक्तों ने 14 आपत्तियां जताई थीं, हालांकि चुनाव आयोग ने इन फैसलों को सर्वसम्मति वाला बताया है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने भी सोमवार को स्पष्ट किया था कि उसने नए मतदाताओं के नामांकन के लिए फॉर्म 6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है।