CEC के खिलाफ प्रदर्शनकारियों पर पुलिस बर्बरता, राहुल गांधी ने दी चेतावनी

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के साथ दिल्ली पुलिस द्वारा की गई कथित बर्बरता पर कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदर्शनकारियों पर हमला करने वाले जिम्मेदार लोग किसी भी सूरत में बच नहीं पाएंगे और उन्हें इसका खामियाजा भुगतना होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को संबोधित करते हुए कहा कि ये विरोध प्रदर्शन किसी एक वर्ग के नहीं, बल्कि धर्म, जाति और लिंग से परे पूरे भारत की आवाज है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के कार्यकर्ताओं ने पुलिस हिरासत में हुई हिंसा की आपबीती सुनाई। केरल की रहने वाली दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा अथिरा ने आरोप लगाया कि 13 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उनके साथ इतनी बेरहमी से मारपीट की कि उनके एक कान की सुनने की क्षमता चली गई। उन्होंने बताया कि उन्हें छाती, पेट, पीठ और निजी अंगों पर पीटा गया। अथिरा ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि हिरासत के दौरान वहां कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी, जो अनिवार्य प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन है। वहीं, एक अन्य महिला कार्यकर्ता ने कांस्टेबल चंचल यादव पर उन्हें गर्दन से पकड़ने और चेहरे पर खरोंच मारने का आरोप लगाया है।
हिरासत में हिंसा और कानूनी लड़ाई
कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने लेडी हार्डिंग अस्पताल में घायलों से मुलाकात की और उनके दावों की पुष्टि की। उन्होंने विशेष रूप से महिला छात्रों की हिरासत के दौरान महिला कर्मियों की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए। दरअसल, NSUI और भारतीय युवा कांग्रेस द्वारा आयोजित ये विरोध प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किए जा रहे हैं, जिसमें मतदाता सूची संशोधन में गड़बड़ी या 'वोट चोरी' के आरोप लगाए गए हैं।
इस पूरे मामले में कानूनी प्रक्रिया भी जारी है। दिल्ली हाई कोर्ट में NSUI के एक पदाधिकारी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई हो रही है, जिसमें 10 अक्टूबर से हो रहे हमलों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। दूसरी ओर, प्रशासन ने विरोध प्रदर्शनों पर सख्ती बढ़ा दी है और 11 अक्टूबर को जंतर मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में डी-नोटिफाई कर दिया गया है। इसी बीच, कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका को शांति भंग करने और अतिक्रमण के आरोप में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार के इस रवैये की आलोचना करते हुए इसे 'सत्तावाद' करार दिया है।