चुनाव आयोग मार्च: राहुल गांधी समेत 300 विपक्षी सांसद पुलिस के हत्थे चढ़े, दिल्ली में भारी हंगामा

Kittu Kumari6 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
चुनाव आयोग मार्च: राहुल गांधी समेत 300 विपक्षी सांसद पुलिस के हत्थे चढ़े, दिल्ली में भारी हंगामा

देश की राजधानी दिल्ली में मंगलवार को उस वक्त तनाव बढ़ गया जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में 300 से अधिक विपक्षी सांसद चुनाव आयोग के दफ्तर की ओर कूच कर निकले। इंडिया गठबंधन के इन सांसदों का मकसद मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और उनके सहयोगियों से मिलकर मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) और 2024 के लोकसभा चुनावों में कथित 'वोट चोरी' के मुद्दे पर बात करना था। लेकिन यह मार्च मंजिल तक नहीं पहुँच सका और दिल्ली पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में ही रोक दिया।

पुलिस ने सांसदों को आकाशवाणी भवन के पास ही रोक लिया, जबकि चुनाव आयोग का मुख्यालय वहां से महज 50 गज की दूरी पर था। जब पुलिस ने आगे बढ़ने से मना किया, तो राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी नेताओं ने वहीं आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठने का फैसला किया। इस दौरान राहुल गांधी ने पुलिस की इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को एक संवैधानिक संस्था तक पहुँचने से क्यों रोका जा रहा है? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि 'ज्ञानेश कुमार डरे हुए हैं'।

नारेबाजी और गंभीर आरोप: 'वोट चोर, गद्दी छोड़'

विरोध प्रदर्शन के दौरान माहौल काफी गरमाया रहा। प्रदर्शनकारी सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ऐसे कटआउट्स दिखाए जिनमें उन्हें आरएसएस की वर्दी पहने दिखाया गया था। साथ ही 'वोट चोर, गद्दी छोड़' जैसे तीखे नारे लगाए गए। राहुल गांधी ने यह आरोप भी लगाया कि पुलिस ने मौके पर मौजूद मीडिया कर्मियों को हटाने की कोशिश की। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं ताकि लोगों के मतदान अधिकारों को कमजोर किया जा सके।

दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस विरोध मार्च के लिए कोई औपचारिक अनुमति नहीं ली गई थी, इसलिए सुरक्षा कारणों से इसे रोकना पड़ा। गौरतलब है कि चुनाव आयोग और राहुल गांधी के बीच तनातनी पुरानी है। अगस्त 2025 में मुख्य चुनाव आयुक्त ने राहुल गांधी के 'वोट चोरी' के आरोपों को संविधान का अपमान बताया था और उनसे माफी या हलफनामा मांगा था। फिलहाल यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में भी है, जिससे राजनीतिक पारा और चढ़ा हुआ है।

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