वोटर लिस्ट ऑडिट की मांग: राहुल गांधी और खड़गे ने सुप्रीम कोर्ट में दी दस्तक, SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। विपक्षी नेताओं ने देश भर में चल रहे 'विशेष गहन संशोधन' (Special Intensive Revision - SIR) की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए इसे तुरंत रोकने और वोटर लिस्ट का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की है।
संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि वोटर लिस्ट में नामों को हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति बनाई जाए, जो इस पूरी कवायद और ईवीएम (EVM) व वोटर डेटाबेस के तकनीकी सिस्टम की बारीकी से जांच करे।
चुनाव आयोग के फैसलों और पारदर्शिता पर उठाए सवाल
इस याचिका में सबसे गंभीर सवाल चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया पर उठाए गए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति या जानकारी के बिना अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया है। विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि इस पूरे मामले से जुड़ी फाइलें, मिनट्स और नोटिंग्स कोर्ट के सामने पेश की जाएं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फैसले कानून के मुताबिक लिए गए थे या नहीं।
याचिका में एक अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर अन्य चुनाव आयुक्तों ने वोटर रजिस्ट्रेशन और डेटा एक्सेस जैसे मुद्दों पर अपनी असहमति दर्ज कराई थी। हालांकि, चुनाव आयोग ने पहले ही कहा है कि विचार-विमर्श के दौरान मतभेद होना सामान्य है और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।
इसके अलावा, याचिका में 'फॉर्म 6' में किए गए बदलावों पर भी आपत्ति जताई गई है। आरोप है कि ऑनलाइन फॉर्म में बिना किसी कानूनी संशोधन के नई शर्तें जोड़ी गईं, जिससे नए मतदाताओं के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से इस संशोधित फॉर्म को मंजूरी नहीं दी थी, तो इसे लागू करना गलत है।