राहुल गांधी की 'दिल्ली चलो' कॉल पर रामलीला मैदान में उमड़ा जनसैलाब, वोट की ताकत दिखाने उतरे विपक्षी नेता
रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की 'दिल्ली चलो' रैली आयोजित, वोटिंग अधिकारों और चुनाव आयोग के खिलाफ जताया कड़ा विरोध।

लोकतंत्र में वोट की ताकत सबसे बड़ी होती है और इसी अधिकार की रक्षा के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'दिल्ली चलो' आह्वान पर रविवार को देश भर से हजारों समर्थक राजधानी दिल्ली पहुंचे। रामलीला मैदान में आयोजित INDIA गठबंधन की इस विशाल रैली में न केवल दिल्ली, बल्कि तमिलनाडु सहित देश के कोने-कोने से कांग्रेस कार्यकर्ता और अन्य सहयोगी दलों के समर्थक जुटे। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य कथित 'वोट चोरी' का विरोध करना और नागरिकों के मतदान अधिकारों को सुरक्षित करना था।
रैली के दौरान कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक संघर्ष है। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु के राज्य मंत्रियों सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी इस मुहिम का हिस्सा बने हैं। टैगोर ने जोर देकर कहा कि राहुल गांधी के अनुसार, एक व्यक्ति का वोट लोकतंत्र का सबसे शक्तिशाली हथियार है, लेकिन वर्तमान सरकार और भाजपा इस अधिकार को छीनने की साजिश रच रहे हैं।
चुनाव आयोग और CEC के खिलाफ गूंजी आवाज
इस विरोध प्रदर्शन में केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि INDIA गठबंधन के 19 दल शामिल हुए। कांग्रेस नेता गुलाम अहमद मीर ने इसे चुनाव आयोग और विशेष रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक ऐतिहासिक प्रदर्शन करार दिया। मीर ने आरोप लगाया कि CEC ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया है और संविधान की मूल भावना को तोड़ा है, इसलिए उनकी तत्काल बर्खास्तगी होनी चाहिए।
रैली में वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए। समाजवादी पार्टी के सांसद नीरज मौर्य और गुलाम अहमद मीर ने दावा किया कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के नाम पर करीब 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मतदान के अधिकारों के साथ छेड़छाड़ जारी रही, तो जनता का आक्रोश और बढ़ेगा और यह आंदोलन और भी व्यापक रूप लेगा।
रामलीला मैदान में उमड़ी इस भीड़ में करीब 8 से 10 लाख लोगों के होने का दावा किया गया। इस मौके पर मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, हेमंत सोरेन, रेवंत रेड्डी और तेजस्वी यादव जैसे दिग्गज नेता मौजूद रहे, जिन्होंने एकजुट होकर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की मांग की।