राहुल गांधी ने शेयर किया रहस्यमयी पोस्ट, चुनाव आयोग पर विवाद जारी

नई दिल्ली। निर्वाचन आयोग के कामकाज और विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक रहस्यमयी पोस्ट साझा किया। इसमें उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियां भी अपने साथ शांति का अहसास ला सकती हैं। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उन्हें समुद्र में तब तैरना पसंद है जब वह अशांत हो, क्योंकि यह सिखाता है कि अशांति भी शांति का ही एक रूप है।
यह पोस्ट ऐसे समय में सामने आया है जब विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग के कामकाज की आलोचना की जा रही है। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक खोजी रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं। रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने उनकी जानकारी के बिना लिए गए कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई थी। यह घटनाक्रम राहुल गांधी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला करने के ठीक एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने उन पर चुनावों में मैच-फिक्सिंग का आरोप लगाया था।
राहुल गांधी ने केरल के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन के उस दावे से जुड़ी एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि ज्ञानेश कुमार ने 2016 में उनसे संपर्क किया था और सुझाव दिया था कि वह भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ें। गांधी ने अपने पोस्ट में कहा कि पहले एक सेवारत आईएएस अधिकारी के रूप में ज्ञानेश कुमार का इस्तेमाल भाजपा के लिए भर्ती करने के वास्ते किया गया और फिर मोदी तथा शाह ने उन्हें अंपायर बनाकर भारत के चुनावों में मैच-फिक्सिंग की जिम्मेदारी सौंप दी। गांधी द्वारा उद्धृत रिपोर्ट के अनुसार, थॉमसन ने दावा किया था कि यह बातचीत उनकी सेवानिवृत्ति के समय दिल्ली जाने वाली एक उड़ान के दौरान हुई थी। उन्होंने कहा कि कुमार ने सुझाव दिया था कि उन्हें 2019 का चुनाव भाजपा उम्मीदवार के रूप में लड़ना चाहिए, सांसद बनना चाहिए और बाद में मंत्री बनना चाहिए। थॉमसन ने कहा कि उन्होंने कथित प्रस्ताव ठुकरा दिया था।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने एसआईआर निर्णयों पर असहमति के आरोपों को खारिज कर दिया है। आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया से जुड़े फैसले आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए थे। चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र प्रतिनियुक्ति पर एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था और यह आयोग के किसी नीतिगत मामले या इसके आईटी डिवीजन से संबंधित नहीं था।