नई दिल्ली, 28 सितंबर। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली के बेला एस्टेट में मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह वोट चोरी का एक तरीका है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दावा किया कि यमुना के किनारे बेला एस्टेट में 728 लोग रहते हैं और एसआईआर के बाद वोटर लिस्ट में सिर्फ एक नाम बचा है जबकि 727 नाम काट दिए गए हैं। इन लोगों ने 2024 के लोकसभा और 2025 के दिल्ली चुनावों में मतदान किया था। 2023 में उनके घर गिराए गए थे लेकिन वे यहीं रह रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मौके पर पहुंचकर निवासियों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं।
उन्होंने कहा कि उन्होंने एसडीजी से फोन पर बात करके यही कहा कि घर होना या न होना मतदान के अधिकार से जुड़ा नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने खुद कहा है कि बेघर लोगों के लिए हाउस नंबर शून्य होता है। फिर भी 727 लोगों के नाम काट दिए गए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर हमला बोलते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार चले जाएंगे लेकिन उन्हें ऐसा करने वाली व्यवस्था को भी जवाब देना होगा। मूल खबर के लिए
ANI की रिपोर्ट देखें।
इससे पहले शनिवार को राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनावों में मैच फिक्सिंग का आरोप लगाया था।
राहुल गांधी ने एक मलयालम समाचार चैनल की रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि सीईसी ने पूर्व केरल मुख्य सचिव जिजी थॉमसन से भाजपा के लिए चुनाव लड़ने को कहा था। कांग्रेस की केरल इकाई ने एशियननेट की रिपोर्ट शेयर करते हुए कहा कि जिजी थॉमसन ने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार ने उन्हें भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने और मंत्री पद की पेशकश की थी। एशियननेट न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार थॉमसन ने बताया कि 2016 में दिल्ली की उड़ान के दौरान यह बातचीत हुई थी जब वे सेवानिवृत्ति के करीब थे।
राहुल गांधी के इस हमले से पहले द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि एसआईआर प्रक्रिया के फैसलों पर तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक Joshi ने बिना जानकारी के जारी किए गए फैसलों पर कई बार आपत्ति जताई थी।
भारत निर्वाचन आयोग ने शनिवार को अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि चुनावी सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के सभी फैसले आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था, न कि किसी नीतिगत मामले से।