जंतर मंतर पर पत्रकारों से बदसलूकी: राहुल गांधी ने अमित शाह से पूछा- 'आप कहां हैं?'

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने जंतर मंतर पर महिला पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों के साथ दिल्ली पुलिस के कथित दुर्व्यवहार को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने इस पूरे मामले पर गृह मंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब पुलिस ने इन गंभीर घटनाओं पर एफआईआर (FIR) दर्ज करने में लापरवाही बरती, तो अमित शाह चुप क्यों हैं।
यह पूरा विवाद 2 अक्टूबर 2026 को जंतर मंतर के पास हुए बड़े प्रदर्शनों के बाद शुरू हुआ। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे करीब 1,000 लोगों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। इस दौरान पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता के तहत सरकारी काम में बाधा डालने और आपराधिक बल के इस्तेमाल जैसे आरोपों में पार्लियामेंट स्ट्रीट और कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशनों में कम से कम तीन एफआईआर दर्ज की थीं।
पत्रकारों का आरोप: कैमरे छीने और किया शारीरिक उत्पीड़न
घटना के अगले दिन, 3 अक्टूबर को सैकड़ों पत्रकार पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर जमा हुए और पुलिस कर्मियों द्वारा उत्पीड़न और हमले का विरोध किया। पत्रकारों का आरोप है कि पुलिस ने उनके कैमरे छीने और उन्हें घसीटा। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की सदस्य रत्ना सिंह ने एक बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एक महिला प्रदर्शनकारी का एक पुरुष अधिकारी द्वारा यौन उत्पीड़न किया गया। रत्ना सिंह का यह भी दावा है कि जब उन्होंने इस बारे में शिकायत की, तो एक डीसीपी ने उन्हें मामले को आगे न बढ़ाने की सलाह दी।
इस प्रदर्शन के दौरान एइसा (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण को भी हिरासत में लिया गया, जबकि वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल को पुलिस बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश करते देखा गया।
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने हिंसा या अवैध हिरासत की खबरों को खारिज किया है और दावा किया है कि विरोध प्रदर्शन को पेशेवर तरीके से संभाला गया। हालांकि, एक पुलिस अधिकारी ने पुष्टि की है कि पत्रकारों के उत्पीड़न की शिकायतों पर एक औपचारिक शिकायत दर्ज की गई है और इसकी स्वतंत्र जांच की जाएगी।