रेस कोर्स मस्जिद: NDMC ने हाई कोर्ट से कहा, सुरक्षा कारणों से नहीं मिलेगी बिजली

दिल्ली की सदी पुरानी रेस कोर्स मस्जिद बिजली कटौती और खाली कराने के विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक अहम जानकारी देते हुए कहा है कि वह फिलहाल इस मस्जिद की बिजली बहाल करने में असमर्थ है। NDMC का तर्क है कि इलाके में चल रहे तोड़फोड़ (demolition) के कार्यों के कारण वहां सुरक्षा जोखिम बना हुआ है, जिससे बिजली चालू करना खतरनाक हो सकता है।
मामले की शुरुआत 7 अक्टूबर 2026 को हुई, जब मस्जिद की बिजली और पानी की सप्लाई काट दी गई। इसके बाद 19 अक्टूबर को लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) ने इस परिसर को 'अनधिकृत' बताते हुए एक बेदखली नोटिस जारी किया और छह दिनों के भीतर जगह खाली करने का आदेश दिया।
वक्फ बोर्ड और विरासत का दावा
दूसरी ओर, दिल्ली वक्फ बोर्ड ने L&DO को पत्र लिखकर दावा किया है कि यह मस्जिद और उससे सटा कब्रिस्तान वक्फ संपत्तियां हैं, जिसका जिक्र 8 सितंबर 1977 के गजट नोटिफिकेशन में भी है। इतना ही नहीं, यह मस्जिद NDMC के हेरिटेज रजिस्टर में भी दर्ज है और साल 2009 में इसे विरासत का दर्जा दिया गया था।
इस पूरे विवाद में मस्जिद के इमाम मोहम्मद हारून ने दिल्ली वक्फ बोर्ड पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पिछले छह महीनों से वे मदद की गुहार लगा रहे थे, लेकिन बोर्ड ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने पुष्टि की कि प्रशासन ने उन्हें छह दिन के भीतर परिसर खाली करने का आदेश दिया है।
इस मुद्दे पर अब राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजीजू से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है और वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली की आलोचना की है। वहीं, जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने भी मंत्री रिजीजू को ज्ञापन सौंपा है और L&DO के नोटिस को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी की है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने आश्वासन दिया है कि उनका कार्यालय इस स्थिति को सुलझाने के लिए हर संभव प्रयास करेगा।