दिल्ली: पीएम आवास के पास स्थित सदी पुरानी रेस कोर्स मस्जिद पर विध्वंस का खतरा, बढ़ा तनाव
प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित सदी पुरानी रेस कोर्स मस्जिद को खाली करने का नोटिस जारी, विवाद गहराया।

देश की राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक निवास के पास स्थित सदी पुरानी रेस कोर्स मस्जिद को लेकर विवाद गहरा गया है। लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) ने इस मस्जिद को खाली करने का नोटिस जारी किया है, जिसके बाद मुस्लिम समुदाय और स्थानीय लोगों में भारी चिंता और तनाव देखा जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि यह संरचना सरकारी जमीन पर बिना किसी अनुमति के बनी है, इसलिए इसे हटाया जाना जरूरी है।
मस्जिद के इमाम मोहम्मद हारून, जो पिछले करीब 40 वर्षों से यहाँ सेवा दे रहे हैं, ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि 7 अक्टूबर 2026 को ही मस्जिद की बिजली और पानी की सप्लाई काट दी गई थी, ताकि नमाजियों को यहाँ आने से रोका जा सके और उन्हें मजबूर किया जा सके। इमाम के मुताबिक, उन्होंने पिछले छह महीनों से दिल्ली वक्फ बोर्ड से मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
विरासत और कानूनी दावों के बीच फंसी मस्जिद
इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि यह मस्जिद न्यू दिल्ली नगर परिषद (NDMC) द्वारा ग्रेड-II हेरिटेज स्मारक के रूप में मान्यता प्राप्त है। साथ ही, 8 सितंबर 1977 को दिल्ली प्रशासन द्वारा इसे आधिकारिक तौर पर वक्फ संपत्ति के रूप में गजट किया गया था। इमाम का दावा है कि 2021 में हुए एक सर्वे में भी इस ढांचे को अतिक्रमण के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया था।
यह पूरा विवाद रेस कोर्स रोड इलाके में चल रहे एक बड़े विध्वंस अभियान का हिस्सा है। हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट ने नागरिक अधिकारियों को पास की झुग्गियों को खाली करने की अनुमति दी है, जिससे हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के कई घर प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस बात से इनकार किया है कि यह कार्रवाई केवल धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर की जा रही है।
इस मुद्दे ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात कर मस्जिद और उसके पास स्थित कब्रिस्तान को बचाने की मांग की है। मंत्री रिजिजू ने आश्वासन दिया है कि वे इस मामले को सुलझाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। वहीं, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने वक्फ बोर्ड की निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं और PDP प्रमुख मेहबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार पर धार्मिक भावनाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।