रेस कोर्स मस्जिद को बचाने की जंग: दिल्ली हाई कोर्ट में पहुंची याचिका

प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद को बचाने की कानूनी जंग जारी, हाई कोर्ट में याचिका पर सुनवाई।

Kittu Kumari27 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
रेस कोर्स मस्जिद को बचाने की जंग: दिल्ली हाई कोर्ट में पहुंची याचिका

प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद बचाव की मांग को लेकर अब कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। दिल्ली हाई कोर्ट में इस मस्जिद को ढहाए जाने से बचाने के लिए एक याचिका दायर की गई है। यह मामला तब गरमाया जब इस सदी पुरानी मस्जिद की बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं काट दी गईं, जिससे वहां के इमाम और नमाजियों में भारी नाराजगी है।

दरअसल, यह मस्जिद ग्रेड-II हेरिटेज स्ट्रक्चर है और 1977 के गजट नोटिफिकेशन के अनुसार वक्फ संपत्ति में दर्ज है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब 7 अक्टूबर 2026 को मस्जिद की बिजली और पानी की सप्लाई बंद कर दी गई। इमाम मोहम्मद हारून ने इन सुविधाओं को बहाल करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन 15 अक्टूबर को जस्टिस सौरभ बनर्जी ने इस याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इमाम की कानूनी स्थिति और संपत्ति के स्टेटस को लेकर तथ्यों में गंभीर विवाद है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और विरासत के बीच टकराव

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इस पूरे विवाद के केंद्र में 53 एकड़ का रेस कोर्स क्लब कॉम्प्लेक्स है। न्यू दिल्ली नगर परिषद (NDMC) का तर्क है कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के कारणों से इस पूरी जमीन का अधिग्रहण कर रही है, जिसके चलते वहां तोड़फोड़ का काम चल रहा है। इसी वजह से मस्जिद में सुविधाएं बहाल करना संभव नहीं है। हालांकि, इमाम हारून का आरोप है कि अधिकारियों ने उन्हें परिसर खाली करने के लिए दबाव डाला, जबकि सरकारी सूत्रों का कहना है कि मस्जिद को कोई औपचारिक नोटिस नहीं दिया गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली वक्फ बोर्ड ने लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) को पत्र लिखकर मस्जिद की सुरक्षा की मांग की है। वहीं, इस मुद्दे ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू से हस्तक्षेप की अपील की है। साथ ही, जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने भी इस विरासत स्थल को बचाने के लिए ज्ञापन सौंपा है।

आम आदमी पार्टी के नेता अमानतुल्ला खान ने भी इस demolition प्लान की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने मस्जिद के ऐतिहासिक महत्व और इसके संरक्षित हेरिटेज स्टेटस का हवाला देते हुए इसे बचाने की बात कही है। फिलहाल, पुलिस की कड़ी निगरानी में मस्जिद में जुमे की नमाज अदा की जा रही है, लेकिन आम लोगों की पहुंच वहां काफी सीमित कर दी गई है।

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