सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट: केंद्र ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा, हटानी होगी कदीमी मस्जिद
केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के लिए कदीमी मस्जिद को हटाना जरूरी है। जानिए क्या है पूरा मामला।

सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना को लेकर केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को सूचित किया है कि कृषि भवन परिसर में स्थित कदीमी मस्जिद सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत कॉमन सेंट्रल सचिवालय (CCS) की बिल्डिंग 4 और 5 के पुनर्विकास के लिए हटानी होगी।
भूमि और विकास कार्यालय (L&DO) के माध्यम से 27 अक्टूबर को दाखिल एक स्टेटस रिपोर्ट में केंद्र ने तर्क दिया है कि सरकारी संपत्ति के भीतर मस्जिद की मौजूदगी इसकी धर्मनिरपेक्ष प्रकृति के अनुकूल नहीं है। सरकार का स्पष्ट कहना है कि यह जमीन भारत सरकार की है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 8 नवंबर 1940 के एक समझौते के तहत मस्जिद की प्रबंध समिति को केवल 'परमिसिव पजेशन' (अनुमति आधारित कब्जा) दिया गया था, न कि मालिकाना हक।
कोर्ट में सरकार का बदला स्टैंड और कानूनी बहस
दिलचस्प बात यह है कि सरकार का यह वर्तमान रुख 2021 के उसके पुराने स्टैंड से बिल्कुल अलग है। उस समय सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया था कि इस प्रोजेक्ट से मस्जिद प्रभावित नहीं होगी। हालांकि, अब सरकार इसे राष्ट्रीय महत्व की एक अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजना बता रही है।
2 नवंबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस अनीश दयाल ने सरकारी वकील से कुछ तीखे सवाल पूछे। कोर्ट ने पूछा कि सरकारी परिसर में प्रार्थना स्थलों को प्रतिबंधित करने वाले नियम क्या हैं और वैकल्पिक सुविधाओं के लिए सरकार की क्या नीति है।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब सितंबर 2026 में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) द्वारा एक टेंडर जारी किया गया, जिसके बाद कदीमी मस्जिद केयरटेकिंग कमेटी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने अब मस्जिद कमेटी को अपना औपचारिक जवाब दाखिल करने का समय दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को तय की गई है, जिसमें सरकार के प्लान की बारीकी से जांच की जाएगी।