पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का सख्त आदेश, गुरुग्राम जल संकट पर तुरंत उठाएं कड़े कदम

Kittu Kumari26 September 20262 min read2 viewsNCR
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का सख्त आदेश, गुरुग्राम जल संकट पर तुरंत उठाएं कड़े कदम

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुग्राम में लगातार बिगड़ते जल संकट को ठीक करने के लिए सख्त आदेश दिए हैं। अदालत ने 22 सितंबर 2026 को दिए अपने आदेश में कहा है कि अगर भूजल स्तर को सुधारने के लिए तुरंत कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो शहर का भविष्य बहुत खराब होगा। यह आदेश सुनील सिंह बनाम पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और अन्य मामले की सुनवाई के दौरान आया है, जिसमें कुतुब एन्क्लेव रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन भी शामिल है। बेंच ने निजी बोरवेल के अंधाधुंध इस्तेमाल, प्राकृतिक जल स्रोतों के खत्म होने और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के सही से काम न करने पर गहरी चिंता जताई है। अदालत ने यह भी कहा कि गुरुग्राम मानसून के पानी का इस्तेमाल भूजल बढ़ाने के लिए नहीं कर पाता है और इसके प्राकृतिक रास्ते भी बंद हैं।

सुझाव और अगली सुनवाई की तारीख

सभी पक्षों को 28 सितंबर 2026 तक अपने लिखित सुझाव देने का आदेश दिया गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर 2026 को होगी, जिसमें गुरुग्राम नगर निगम के मुख्य अभियंता, गुरुग्राम के डिप्टी कमिश्नर, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के अधिकारी और गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) के अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होना होगा। इसके अलावा केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के तहत आने वाले केंद्रीय भूजल प्राधिकरण को भी भूजल घटने की रफ्तार पर एक पूरी रिपोर्ट देने को कहा गया है।

मानवाधिकार आयोग की कार्रवाई और पानी की आपूर्ति की समस्या

हरियाणा मानवाधिकार आयोग (HHRC) ने 24 अगस्त को हुई भारी जलभराव की घटना के बाद 8 सितंबर 2026 को खुद इस मामले पर संज्ञान लिया है। आयोग ने इस बुनियादी ढांचे की नाकामी को संस्थागत चूक बताया है। HHRC ने तकनीकी ऑडिट, अवैध कब्जे हटाने के लिए जीआईएस आधारित मैपिंग और हाई-क्षमता वाले इंजेक्शन कुएं बनाने का निर्देश दिया है, जिसकी अनुपालन रिपोर्ट 15 दिसंबर 2026 तक देनी होगी। इन प्रशासनिक परेशानियों के साथ-साथ अगस्त के आखिर और सितंबर 2026 की शुरुआत में बसई वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में आई तकनीकी खराबी और पाइपलाइन टूटने की वजह से पानी की आपूर्ति भी बाधित हुई, जिससे लोगों को निजी टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ा।

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