Rcom मनी लॉन्ड्रिंग मामला: पूर्व डायरेक्टर पुनीत नरेंद्र गर्ग को दिल्ली हाई कोर्ट से मिली जमानत

रिलायंस कम्युनिकेशंस (Rcom) के पूर्व डायरेक्टर पुनीत नरेंद्र गर्ग को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को करीब 40,000 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसे गर्ग की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। जस्टिस संजीव नरूला ने पुनीत नरेंद्र गर्ग को कुछ शर्तों के साथ जमानत देने का आदेश दिया, जिसमें 5 लाख रुपये का बेल बॉन्ड और उतनी ही राशि की दो जमानतें पेश करना शामिल है।
पुनीत नरेंद्र गर्ग के वकील के तौर पर सीनियर एडवोकेट पवन नारंग पेश हुए। गौरतलब है कि गर्ग की जमानत की राह इतनी आसान नहीं थी। इससे पहले 15 जून को ट्रायल कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने जुलाई में हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
बीमारी और कानूनी लड़ाई का लंबा सफर
इस मामले में पुनीत नरेंद्र गर्ग की सेहत एक बड़ा मुद्दा रही थी। 61 वर्षीय गर्ग ने अप्रैल में मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत की मांग की थी। उन्होंने दलील दी थी कि वे क्रोहन कोलाइटिस (एक गंभीर आंत रोग), ऑस्टियोपोरोसिस, हाइपरटेंशन और प्रोस्टेट जैसी कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं और जेल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाएं अपर्याप्त हैं। हालांकि, उस समय स्पेशल जज अजय गुप्ता ने एम्स (AIIMS) मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
इस पूरे मामले की जड़ें सीबीआई की एक एफआईआर से जुड़ी हैं, जिसके आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच शुरू की थी। ईडी ने पुनीत गर्ग को 29 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया था। उन पर आरकॉम और उसकी ग्रुप कंपनियों द्वारा किए गए करीब 40,000 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप हैं। ईडी ने इस मामले में चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी, जिस पर राउज एवेन्यू कोर्ट ने संज्ञान लिया था।
ईडी ने अपनी जांच के दौरान गर्ग की गिरफ्तारी के बाद 9 दिनों की रिमांड ली थी ताकि अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) का पता लगाया जा सके और मनी लॉन्ड्रिंग के पूरे नेटवर्क को उजागर किया जा सके। अब हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत से राहत मिलेगी।