CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, सुप्रीम कोर्ट के बाहर प्रदर्शनकारियों ने तोड़े बैरिकेड्स

देश की राजधानी दिल्ली में माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हजारों प्रदर्शनकारी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। INDIA गठबंधन और युवाओं की 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए बैरिकेड्स पार कर लिए। यह पूरा विवाद मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान हुई कथित गड़बड़ियों और वोटर फ्रॉड के आरोपों से जुड़ा है।
आरोप है कि चुनावी रोल से करीब 13 करोड़ नाम हटा दिए गए हैं, जिसका सबसे ज्यादा असर अल्पसंख्यकों पर पड़ा है। इसी गंभीर मुद्दे को लेकर विपक्षी नेता राहुल गांधी ने 10 अन्य नेताओं के साथ सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में एक औपचारिक याचिका दायर की है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने निर्देश दिया है कि इस याचिका पर मंगलवार, 13 अक्टूबर को सुनवाई की जाएगी। हालांकि, CJI ने विपक्षी नेताओं से सीधे मिलने से इनकार कर दिया और स्पष्ट किया कि अदालत को राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक गतिविधियां शांतिपूर्ण होनी चाहिए और इनसे न्यायिक कार्यों में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए।
इमरजेंसी जैसी स्थिति और कानूनी लड़ाई
यह तनाव 10 अक्टूबर से शुरू हुआ था, जब प्रशासन ने बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लिया। वरिष्ठ वकीलों ने इस कार्रवाई की तुलना 1975 की इमरजेंसी से की है। हालांकि, 11 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए अनावश्यक बैरिकेड्स हटाने और धारा 163 (BNSS) के तहत भीड़ पर लगी पाबंदियों को हटाने का आदेश दिया। अदालत ने प्रदर्शनकारियों की 'अवैध' हिरासत के मामले में दिल्ली पुलिस, केंद्रीय गृह सचिव और DMRC को नोटिस भी जारी किया है, जिसके बाद कई प्रदर्शनकारियों को रिहा किया गया।
दूसरी तरफ, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने भी एक याचिका दायर की है, जिसमें प्रदर्शनों के कारण वकीलों को होने वाली परेशानियों का जिक्र है; इस पर भी 13 अक्टूबर को सुनवाई होगी। वहीं दिल्ली पुलिस ने अब जंतर मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में डी-नोटिफाई कर दिया है और प्रदर्शनकारियों को रामलीला ग्राउंड, बुरारी ग्राउंड और ईस्ट दिल्ली के CBD ग्राउंड जाने का निर्देश दिया है।
इस पूरे मामले पर सत्ता पक्ष और चुनाव आयोग का रुख साफ है। भाजपा और चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट में हेरफेर के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह केवल फर्जी, डुप्लीकेट या मृत मतदाताओं के नाम हटाने की एक आवश्यक प्रक्रिया थी। जहां सरकार प्रदर्शनकारियों को 'अराजकतावादी' बता रही है, वहीं राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह लड़ाई संविधान को बचाने की है। इस बीच, हफ्ते भर से पत्रकारों और सांसदों के साथ पुलिस की बदसलूकी की खबरें भी सामने आ रही हैं।