CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में उमड़ा जनसैलाब, रामलीला मैदान में गूंजे नारे
INDIA गठबंधन ने रामलीला मैदान में भारी भीड़ के साथ CEC के इस्तीफे की मांग की। वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं।

देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। 1 नवंबर, 2026 को 'चलो दिल्ली' मार्च के तहत हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे और रामलीला मैदान में एक विशाल रैली आयोजित की। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग करना था। INDIA गठबंधन के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी जैसे दिग्गज नेता शामिल हुए, जबकि युवाओं की 'कॉकरोच जनता पार्टी' ने भी इसमें अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई।
वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के गंभीर आरोप
विरोध प्रदर्शन कर रहे नेताओं और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चुनाव आयोग ने 'विशेष गहन संशोधन' (Special Intensive Revision) के नाम पर वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया है। विपक्ष का दावा है कि आयोग ने चुनावी सूचियों से लगभग 13 करोड़ से अधिक नाम हटा दिए हैं। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया राजनीतिक रूप से प्रेरित है, जिसका मकसद अल्पसंख्यक समुदायों और गरीबों को मताधिकार से वंचित करना है ताकि गैर-भाजपा मतदाताओं को नुकसान पहुंचाया जा सके।
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। आयोग का कहना है कि यह केवल एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया थी, जिसका उद्देश्य मृत, डुप्लीकेट और अपात्र मतदाताओं के नामों को हटाना था। भाजपा द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, हटाए गए नामों में 2.8 करोड़ मृत मतदाता, 6.3 करोड़ स्थानांतरित व्यक्ति, 1 करोड़ डुप्लीकेट और 3 करोड़ ऐसे लोग शामिल हैं जिन्हें खोजा नहीं जा सका।
इस रैली से एक दिन पहले, 31 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं ने CEC के खिलाफ छह विशिष्ट आरोप लगाते हुए एक प्रतीकात्मक 'सार्वजनिक महाभियोग' भी चलाया था। 1 नवंबर को राहुल गांधी और अन्य नेता मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक एक खुली बस में सवार होकर पहुंचे और संकल्प लिया कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं दे देते, यह विरोध जारी रहेगा।
उसी समय, भाजपा ने भी 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी के अवसर पर एक अलग मार्च निकाला। शहर में तनाव को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। हजारों पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों की तैनाती के साथ-साथ ड्रोन, सीसीटीवी और बॉडी-वर्न कैमरों के जरिए पूरी निगरानी रखी गई।