CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर BJP मुख्यालय के बाहर भारी प्रदर्शन

देश की राजधानी दिल्ली में शनिवार को माहौल बेहद तनावपूर्ण रहा। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और लेफ्ट पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मुख्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। यह पूरा मामला चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों से जुड़ा है। प्रदर्शनकारियों का गंभीर आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं।
इस विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने कड़े इंतजाम किए थे। पुलिस ने आवेदन में देरी और पुराने नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। साथ ही, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ही प्रशासन को निर्देश दिया था कि सार्वजनिक परिवहन पर पूरी तरह पाबंदी न लगाई जाए, लेकिन इसके बावजूद शहर में भारी सुरक्षा घेरा देखा गया।
सुरक्षा का कड़ा पहरा और बड़े नेताओं की हिरासत
प्रदर्शन के दौरान राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था इतनी सख्त थी कि मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं और दिल्ली मेट्रो के 45 स्टेशनों को बंद करना पड़ा। इसके अलावा 254 ट्रेनों को भी रद्द किया गया। पुलिस ने आंदोलन को दबाने के लिए बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां कीं। हिरासत में लिए गए लोगों में CJP संस्थापक अभिजीत डिपके, AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी और CPI(M) के वरिष्ठ नेता एम ए बेबी, एम वी गोविंदन और पी के श्रीमति शामिल हैं। AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने इस स्थिति की तुलना 'भारत छोड़ो आंदोलन' से करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस आयोजकों के घरों की तलाशी ले रही है।
इस कार्रवाई पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज रही हैं। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भारी बैरिकेडिंग को लोकतंत्र पर हमला बताया। वहीं, कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर युवाओं की आवाज दबाने के लिए राजधानी को किले में बदलने का आरोप लगाया।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट में हेरफेर के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। आयोग का कहना है कि यह केवल संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा है। तनाव इतना बढ़ गया कि आकाशवाणी भवन के पास झड़पें हुईं और पत्थरबाजी की खबरें आईं, जिसमें दो पुलिसकर्मी घायल हो गए।