CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, जंतर मंतर पर जुटे वकील और एक्टिविस्ट

देश की राजधानी दिल्ली का जंतर मंतर एक बार फिर विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बन गया है। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए दिग्गज वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बड़ा प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे भारतीय संविधान की रक्षा और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सड़क पर उतरे हैं।
यह पूरा मामला वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों और चुनाव आयोग की कार्यशैली से जुड़ा है। विपक्षी दलों और 'इंडिया' गठबंधन का आरोप है कि करीब 1.3 करोड़ मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि चुनाव आयोग अब एक स्वतंत्र संस्था के बजाय एक राजनीतिक उपकरण की तरह काम कर रहा है, जिसके चलते उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।
पुलिस की सख्ती और हाई कोर्ट में चुनौती
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण रहा। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। शनिवार को जंतर मंतर की ओर मार्च कर रहे लगभग 150 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा शामिल थीं। इसके अलावा, पुलिस ने 2 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों के सिलसिले में तीन FIR भी दर्ज की हैं।
प्रशासन ने जंतर मंतर इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगा दी है। हालांकि, भारतीय युवा कांग्रेस ने इस पाबंदी को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। वहीं, NSUI ने इंडिया गेट पर अलग से प्रदर्शन कर CEC के इस्तीफे की मांग दोहराई है।
दूसरी तरफ, इस विवाद ने कानूनी मोड़ भी ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के मामले में SIT जांच की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई करने का फैसला किया है। वकील महमूद प्राचा जैसे कानूनी विशेषज्ञों ने पुलिस की इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया है।
दिलचस्प बात यह है कि जहां एक तरफ इस्तीफे की मांग हो रही है, वहीं अग्रवाल और वैश्य संगठनों ने जंतर मंतर पर CEC ज्ञानेश कुमार के समर्थन में प्रदर्शन किया और उन्हें 'भारत रत्न' देने की मांग की। वहीं, बीजेपी ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि विपक्ष अपनी चुनावी हार का गुस्सा चुनाव आयुक्त पर निकाल रहा है।