महंगे प्रोटीन सप्लीमेंट छोड़िए, अब आपकी रोज की रोटी से मिलेगी भरपूर ताकत

क्या प्रोटीन के लिए महंगे सप्लीमेंट जरूरी हैं? जानिए कैसे आपकी रोज की रोटी अब आपको देगी भरपूर प्रोटीन और बेहतर सेहत।

Kittu Kumari31 October 20262 min read0 viewsNational
महंगे प्रोटीन सप्लीमेंट छोड़िए, अब आपकी रोज की रोटी से मिलेगी भरपूर ताकत

अक्सर जब हम प्रोटीन की बात करते हैं, तो दिमाग में महंगे सप्लीमेंट, प्रोटीन पाउडर और जिम वाले रूटीन की तस्वीर आती है। लेकिन भारत के आम घरों में, जहां रात के खाने में रोटी, दाल और सब्जी मुख्य होती है, वहां ये महंगे पाउडर पहुंच नहीं पाते। असलियत यह है कि पोषण की बातचीत अक्सर उन चीजों के इर्द-गिर्द घूमती है जो हर किसी की जेब के दायरे में नहीं होतीं। इसी अंतर को पाटने के लिए अब एक नया प्रयास किया जा रहा है, जिसमें प्रोटीन को किसी बाहरी सप्लीमेंट के बजाय सीधे हमारी थाली की सबसे बुनियादी चीज यानी 'रोटी' में शामिल करने की बात कही गई है।

एक हालिया अध्ययन (CEEW) के मुताबिक, भारत में घर पर लिए जाने वाले प्रोटीन का करीब आधा हिस्सा अनाजों से आता है, जो मुख्य रूप से कैलोरी देते हैं, प्रोटीन नहीं। साथ ही, यह भी सामने आया है कि अमीर परिवारों में प्रोटीन की खपत गरीब परिवारों की तुलना में करीब 1.5 गुना ज्यादा है। इसका मतलब है कि पोषण की गुणवत्ता आज भी इस बात पर निर्भर करती है कि आपकी जेब में कितने पैसे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हम केवल जागरूकता अभियानों से इस कमी को पूरा कर सकते हैं, या हमें ऐसे समाधान चाहिए जो आम आदमी के बजट में हों?

सप्लीमेंट का बोझ नहीं, पोषण का नया अंदाज

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प्रोटीन हमारी मांसपेशियों की मजबूती और रिकवरी के लिए बेहद जरूरी है। आमतौर पर लोगों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी डाइट में बदलाव करें या महंगे उत्पाद खरीदें, लेकिन MillD ने इस सोच को बदला है। उनका मानना है कि पोषण के लिए नए रूटीन की जरूरत नहीं, बल्कि मौजूदा खाने की गुणवत्ता सुधारने की जरूरत है।

इस पहल के तहत ऐसी रोटी तैयार की गई है जो किफायती भी है और पौष्टिक भी। एक ऐसी रोटी, जिसकी कीमत करीब 7 रुपये है, वह लगभग 15 ग्राम प्रोटीन दे सकती है। इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति सिर्फ 3 रोटियां खाता है, तो उसे करीब 46 ग्राम प्रोटीन मिल सकता है। यह तरीका उन करोड़ों परिवारों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है जो महंगे सप्लीमेंट्स नहीं खरीद सकते।

इस मुहिम को बढ़ावा देने के लिए बॉलीवुड सितारे रितेश देशमुख और जेनेलिया डी'सूजा भी नजर आए हैं, जो इस बात पर जोर दे रहे हैं कि बेहतर पोषण के लिए ज्यादा पैसे खर्च करना जरूरी नहीं है। MillD के सह-संस्थापक शिवराम ब्रायस का कहना है कि आटा एक ऐसा माध्यम है जिससे लोगों को अपनी खाने की आदतें बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वे आसानी से अपनी सेहत सुधार सकेंगे। वहीं निवेशक प्रशांत पित्ठी के अनुसार, भारत को एक मजबूत राष्ट्र बनाने के लिए हमें ऐसे किफायती समाधानों की जरूरत है जो भारतीय परिवारों की रसोई और बजट में फिट बैठें।

अंततः, असली प्रगति वह नहीं है जो हमें एक नया और कठिन रूटीन अपनाने पर मजबूर करे, बल्कि वह है जो हमारी रोज की रोटी को ही बेहतर और सेहतमंद बना दे।

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