चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन: प्रियंका गांधी और राहुल गांधी समेत कई दिग्गज नेता हिरासत में

देश की राजधानी दिल्ली में मंगलवार को उस वक्त भारी गहमागहमी रही, जब कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और INDIA गठबंधन के कई बड़े नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई तब हुई जब विपक्षी नेता चुनाव आयोग (ECI) के मुख्यालय की ओर विरोध मार्च निकाल रहे थे। संसद से शुरू हुआ यह प्रदर्शन नीति आयोग कार्यालय के पास पहुँचते ही पुलिस की बाधाओं से टकरा गया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने आकाशवाणी भवन के सामने धरना दिया, जहाँ से पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर किंग्सवे कैंप भेज दिया।
इस विरोध प्रदर्शन में करीब 250 लोग शामिल थे, जिनमें लगभग 50 सांसद मौजूद थे। हिरासत में लिए गए नेताओं में राहुल गांधी, के.सी. वेणुगोपाल, पवन खेरा, के. सुरेश, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, इमरान प्रतापगढ़ी, टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और डेरेक ओ'ब्रायन जैसे बड़े नाम शामिल थे। इसके साथ ही यूथ कांग्रेस और NSUI के कार्यकर्ता भी इस मार्च का हिस्सा थे।
वोट चोरी का आरोप और CEC के इस्ती की मांग
INDIA गठबंधन के नेताओं का सीधा आरोप है कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन के दौरान "वोट चोरी" को बढ़ावा दिया है। विपक्षी नेताओं का दावा है कि फॉर्म 6 में अवैध बदलाव किए गए ताकि सत्तारूढ़ भाजपा को फायदा पहुँचाया जा सके। राहुल गांधी ने इन आरोपों को बेहद गंभीर बताते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कार्रवाई को "देशद्रोह" करार दिया और उनके इस्तीफे की मांग की।
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने इस कार्रवाई का आधार यह बताया कि प्रदर्शन के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। चुनाव आयोग ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि चुनावी संशोधन से जुड़े सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे। वहीं, भाजपा ने इन आरोपों को महज एक "राजनीतिक नाटक" बताया है।
यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि उसने फॉर्म 6 में किसी भी तरह के बदलाव को मंजूरी नहीं दी थी और कोर्ट अब आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच करेगा। प्रदर्शन के दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण रहा, जहाँ भारी सुरक्षा बल और रैपिड एक्शन फोर्स तैनात थी। खबरों के मुताबिक, राहुल गांधी ने बैरिकेड्स पर चढ़कर तिरंगा लहराया, जिससे विरोध प्रदर्शन और उग्र हो गया। हालांकि, पीआईबी फैक्ट चेक ने उन अफवाहों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि गृह मंत्रालय ने विरोध खत्म करने के लिए बातचीत शुरू की है।