विरोध प्रदर्शनों की कवरेज के लिए प्रेस काउंसिल की नई गाइडलाइन्स, पत्रकारों को तटस्थ रहने और फर्स्ट एड किट रखने की सलाह

देश में विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों के दौरान पत्रकारों की सुरक्षा और जिम्मेदार रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के लिए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। काउंसिल ने 15 अक्टूबर को अपनी बैठक में "विरोध प्रदर्शनों और प्रदर्शनों को कवर करने वाले पत्रकारों के लिए गाइडलाइन्स" को मंजूरी दी है। इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य मीडिया कर्मियों की सुरक्षा को बढ़ाना, रिपोर्टिंग में निष्पक्षता लाना और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
गाइडलाइन्स में पत्रकारों के व्यवहार और सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। काउंसिल ने सलाह दी है कि पत्रकारों को अपनी संस्था या PIB/DIP द्वारा जारी वैध पहचान पत्र हमेशा साथ रखना चाहिए और उसे स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना चाहिए। भीड़ में फंसने से बचने के लिए लैनयार्ड्स (गले में पहनने वाला फीता) को सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है। साथ ही, पत्रकारों को निर्देश दिया गया है कि वे सुरक्षा कारणों से पुलिस द्वारा दिए गए कानूनी निर्देशों का पालन करें और किसी भी स्थिति में उकसावे वाली गतिविधियों से बचें।
सुरक्षा और नैतिकता के लिए कड़े निर्देश
सुरक्षा के लिहाज से प्रेस काउंसिल ने पत्रकारों को भीड़ से उचित दूरी बनाए रखने और अपने आसपास के माहौल पर लगातार नजर रखने को कहा है। गाइडलाइन्स में कुछ अहम बातें शामिल की गई हैं:
- इमरजेंसी किट: पत्रकारों को अपने साथ एक छोटा किट रखना चाहिए जिसमें फर्स्ट एड सप्लाई, पानी, स्नैक्स, टॉर्च, आंखों की सुरक्षा के उपकरण और एक छोटा तौलिया हो। जरूरत पड़ने पर प्रोटेक्टिव हेडगियर और बॉडी आर्मर का इस्तेमाल करने की भी सलाह दी गई है।
- भीड़ प्रबंधन: भीड़ में चलते समय छोटे कदम उठाएं ताकि गिरने या कुचले जाने का खतरा कम हो। हमेशा अपने लिए एक सुरक्षित निकास मार्ग (Escape Route) तैयार रखें।
- तकनीकी सावधानी: कैमरों या रिकॉर्डिंग उपकरणों को पुलिस बैरिकेड्स या वाहनों पर इस तरह न लगाएं कि उससे रास्ता बाधित हो या संपत्ति को नुकसान पहुंचे।
- नैतिक रिपोर्टिंग: खबरों में तथ्यों और आरोपों के बीच अंतर स्पष्ट करें। प्रदर्शनकारियों, पुलिस और सरकारी अधिकारियों के बयानों की समान रूप से जांच करें और जानकारी को कई स्रोतों से सत्यापित करें।
प्रेस काउंसिल ने यह भी स्पष्ट किया है कि सुरक्षा से समझौता करके एक्सक्लूसिव फुटेज पाने की होड़ नहीं होनी चाहिए। पत्रकारों को निर्देश दिया गया है कि वे वास्तविक समय में पुलिस की पोजीशन या उनके निकलने के रास्तों का खुलासा न करें, क्योंकि इससे सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इसके अलावा, नाबालिगों, घायलों और संकट में फंसे निजी नागरिकों की वीडियो बनाते समय विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।
समन्वय के लिए, न्यूज़ रूम्स को एक संपर्क व्यक्ति नियुक्त करने की सलाह दी गई है जो फील्ड पर मौजूद पत्रकारों की लोकेशन पर नजर रखे। फ्रीलांस पत्रकारों को भी अपने किसी भरोसेमंद संपादक या संपर्क व्यक्ति को अपनी लोकेशन और वापसी के समय के बारे में सूचित करना चाहिए।