राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति मुर्मू ने प्रिंस अलोइस का स्वागत किया, आर्थिक साझेदारी को बताया रिश्तों की बुनियाद

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में Liechtenstein के प्रिंस अलोइस और प्रिंसेस सोफी का स्वागत कर आर्थिक रिश्तों पर चर्चा की।

Kittu Kumari27 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति मुर्मू ने प्रिंस अलोइस का स्वागत किया, आर्थिक साझेदारी को बताया रिश्तों की बुनियाद

राष्ट्रपति भवन में एक गरिमामयी मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने Liechtenstein के हेरेडिटरी प्रिंस अलोइस और हेरेडिटरी प्रिंसेस सोफी का स्वागत किया। इस खास मुलाकात में राष्ट्रपति मुर्मू ने दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और Liechtenstein के बीच आर्थिक साझेदारी इन रिश्तों का एक मुख्य स्तंभ है, जिसे अब एक नई दिशा और गति मिली है।

राष्ट्रपति ने विशेष रूप से इंडिया-EFTA ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (TEPA) का जिक्र करते हुए कहा कि अक्टूबर 2025 से लागू होने वाला यह ऐतिहासिक समझौता दोनों देशों के उद्यमियों और व्यवसायों के लिए नए दरवाजे खोलेगा। यह न केवल निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, बल्कि दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक मजबूत तालमेल भी बिठाएगा।

तकनीक और इनोवेशन में सहयोग की नई संभावनाएं

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मुलाकात के दौरान दोनों देशों की ताकत और पूरकता पर चर्चा हुई। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि जहां भारत के पास एक विशाल बाजार, कुशल कार्यबल और नवाचार (innovation) का माहौल है, वहीं Liechtenstein की औद्योगिक और तकनीकी विशेषज्ञता इस रिश्ते को और गहरा बनाती है। प्रिंसेस सोफी ने भी इस बात पर सहमति जताई और भविष्य की संभावनाओं पर रोशनी डाली।

प्रिंसेस सोफी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रिसर्च, स्किल डेवलपमेंट और क्लीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाओं की बात कही। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों के शोधकर्ताओं, उद्यमियों और युवा पेशेवरों के बीच यह तालमेल साझा चुनौतियों के लिए नए और इनोवेटिव समाधान विकसित करने में मददगार साबित होगा।

गौरतलब है कि प्रिंस अलोइस का यह इस साल भारत का दूसरा दौरा है, जिसे राष्ट्रपति मुर्मू ने भारत के प्रति उनके गहरे लगाव और सद्भावना का प्रतीक बताया। 1993 में शुरू हुए इन राजनयिक संबंधों ने पिछले तीन दशकों में व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के जरिए एक लंबी दूरी तय की है। राष्ट्रपति भवन द्वारा आयोजित एक विशेष भोज के दौरान दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि यह द्विपक्षीय सहयोग दोनों देशों के लोगों के लिए बेहद लाभकारी होगा।

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