पारंपरिक कलाकारों को चाहिए वित्तीय आजादी और ट्रेनिंग, राष्ट्रपति मुर्मु ने दिल्ली में कही बात

नई दिल्ली में आयोजित 65वीं नेशनल एग्जीबिशन ऑफ आर्ट के पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देश के पारंपरिक कलाकारों की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सोहराई, मधुबनी और गोंड जैसी पारंपरिक कलाओं को दुनिया भर में पहचान तो मिल रही है, लेकिन इन कलाओं को सहेजने वाले कलाकार आज भी बुनियादी सुविधाओं और अवसरों के लिए संघर्ष कर रहे। राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि पारंपरिक कलाकारों को प्रशिक्षण और वित्तीय स्वायत्तता की सख्त जरूरत है ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकें।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कलाकारों की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि कोलकाता और भुवनेश्वर जैसे महानगरों में पारंपरिक कलाएं अपने मूल रूप में जीवित हैं, लेकिन समय के साथ कदम मिलाने और प्रतिस्पर्धी माहौल में टिकने के लिए इन कलाकारों को 'एक्स्ट्रा सीजनिंग' यानी अतिरिक्त प्रशिक्षण की आवश्यकता है। उन्होंने दुख जताया कि कई कलाकार आज भी दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में रह रहे हैं, जिसकी वजह से वे उन संस्थानों तक नहीं पहुंच पाते जो उन्हें अपनी स्किल्स निखारने और बड़े मंचों तक पहुंचने में मदद कर सकते हैं।
कलाकारों के लिए वित्तीय स्वायत्तता जरूरी
राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि सोहराई और मधुबनी जैसे कलाकारों को अपने गांवों में तो बहुत सम्मान मिलता है, लेकिन जब बात राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की आती है, तो वे पिछड़ जाते हैं। इसका मुख्य कारण उनका अलग-थलग क्षेत्रों में रहना और ललित कलाओं (Fine Arts) के संस्थानों तक पहुंच न होना है। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि इन कलाकारों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्हें इस स्तर की वित्तीय स्वायत्तता की आवश्यकता है जिससे वे फल-फूल सकें। उनकी विचारधारा और सोच को और अधिक व्यापक बनाने की जरूरत है।"
इस मौके पर केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी कला की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कला केवल रंगों और रेखाओं का मेल नहीं, बल्कि वर्षों के अभ्यास और भावनाओं की अभिव्यक्ति है। उन्होंने बताया कि इस साल 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से करीब 2,495 प्रविष्टियां मिली थीं, जिनमें से 270 बेहतरीन कृतियों को चुना गया।
मंत्री शेखावत ने एक बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि संस्कृति मंत्रालय 4 दिसंबर से 'इंडिया बिएननेल' (India Biennale) शुरू करने जा रहा है, जो 108 दिनों तक चलेगा। यह पहल भारतीय कलाकारों और कला संग्राहकों के बीच एक पुल का काम करेगी और भारतीय कला को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने का एक शानदार मंच प्रदान करेगी।