ग्रामीण विकास में योगदान के लिए कोडयोगी के संस्थापक प्रशांत चौधरी को मिला 5वां रोहिणी नय्यर पुरस्कार
कोडयोगी के संस्थापक प्रशांत चौधरी को ग्रामीण विकास में योगदान के लिए 10 लाख रुपये का रोहिणी नय्यर पुरस्कार दिया गया।

तकनीकी शिक्षा के जरिए ग्रामीण युवाओं की जिंदगी बदलने वाले प्रशांत चौधरी रोहिणी नय्यर पुरस्कार से सम्मानित किए गए हैं। कोडयोगी फाउंडेशन के संस्थापक और देहरादून निवासी प्रशांत चौधरी को यह सम्मान भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास में उनके शानदार योगदान के लिए दिया गया है। शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक गरिमामयी समारोह में यह पुरस्कार उन्हें सौंपा गया।
इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के तहत प्रशांत चौधरी को एक ट्रॉफी, प्रशस्ति पत्र और 10 लाख रुपये की नकद राशि प्रदान की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत मौजूद थे, जिन्होंने उन्हें यह सम्मान दिया। इस मौके पर अमिताभ कांत ने ग्रामीण विकास के एक नए मॉडल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गांवों को केवल कल्याणकारी योजनाओं का प्राप्तकर्ता नहीं, बल्कि 'उत्पादक और नवाचारकर्ता' (producers and innovators) बनना चाहिए। उन्होंने ग्रामीण आबादी के लिए बेहतर कनेक्टिविटी, उचित मूल्य और सम्मान की आवश्यकता पर भी चर्चा की।
गांव के लड़के से IIT और फिर बदलाव की कहानी
प्रशांत चौधरी की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह मेरठ के पास एक छोटे से गांव से आते हैं। साल 2010 में वह अपने गांव के पहले ऐसे व्यक्ति बने जिन्होंने IIT में दाखिला लिया। इसी अनुभव और विजन के साथ उन्होंने कोडयोगी फाउंडेशन की शुरुआत की, ताकि ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों के युवाओं को AI और तकनीकी कौशल सिखाया जा सके।
कोडयोगी फाउंडेशन का मॉडल बेहद अनूठा है। यह एक 'स्मार्टफोन-फर्स्ट' और भारतीय भाषाओं पर आधारित लर्निंग प्लेटफॉर्म है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि छात्रों को सीखने के लिए कंप्यूटर, अंग्रेजी भाषा की महारत या किसी पारंपरिक लैब इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं पड़ती।
पिछले तीन वर्षों में इस पहल ने कमाल की रफ्तार पकड़ी है। अब तक 9 राज्यों के 120 जिलों के करीब 3.5 लाख छात्र इस प्रोग्राम से जुड़ चुके हैं। फाउंडेशन ने अब एक बड़ा लक्ष्य रखा है—मार्च 2027 तक दस लाख शिक्षार्थियों तक अपनी पहुंच बनाना।
बता दें कि रोहिणी नय्यर पुरस्कार की शुरुआत 2022 में नय्यर फाउंडेशन द्वारा की गई थी। यह पुरस्कार दिवंगत अर्थशास्त्री और योजना आयोग की पूर्व सदस्य डॉ. रोहिणी नय्यर की स्मृति में दिया जाता है, ताकि ग्रामीण विकास के क्षेत्र में प्रभावशाली कार्य करने वाले 40 वर्ष से कम उम्र के व्यक्तियों को प्रोत्साहित किया जा सके।