चुनाव आयोग का हलफनामा झूठा, जिम्मेदार अधिकारियों पर हो कार्रवाई: प्रशांत भूषण
वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने चुनाव आयोग पर वोटर लिस्ट में बदलाव और गलत हलफनामा देने का आरोप लगाया है। पढ़ें पूरी खबर।

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग (ECI) द्वारा दाखिल किए गए एक हलफनामे को 'झूठा' करार दिया है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। भूषण का आरोप है कि देशभर में वोटर लिस्ट के विशेष गहन संशोधन (SIR) और मतदाता सूची में बदलाव जैसे बड़े फैसले बिना किसी औपचारिक बैठक, वैधानिक समर्थन या लिखित रिकॉर्ड के लिए गए हैं।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रशांत भूषण ने आरटीआई (RTI) से मिले जवाबों का हवाला देते हुए गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब यह पूछा गया कि देशभर में वोटर लिस्ट के संशोधन का फैसला किसने, कब और कैसे लिया, तो चुनाव आयोग ने जवाब दिया कि उनके पास इस संबंध में कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है।
बिना मीटिंग लिए गए बड़े फैसले और फॉर्म 6 में बदलाव
प्रशांत भूषण ने हैरानी जताई कि 1951 के बाद पहली बार इतनी व्यापक स्तर पर वोटर लिस्ट को फिर से तैयार करने जैसा फैसला लिया गया, लेकिन आयोग का दावा है कि इसके लिए कोई औपचारिक बैठक नहीं हुई। उन्होंने सवाल किया कि क्या ईमेल के जरिए सहमति लेना पर्याप्त है और ऐसी क्या इमरजेंसी थी कि औपचारिक बैठकों को नजरअंदाज किया गया।
इसके अलावा, उन्होंने 'फॉर्म 6' में किए गए बदलावों पर भी आपत्ति जताई। भूषण के अनुसार, कानूनी तौर पर फॉर्म 6 में केवल उम्र, पते का प्रमाण और नागरिकता की स्व-घोषणा की जरूरत होती है। लेकिन आयोग ने इसमें वंशानुगत सत्यापन (lineage verification) की शर्त जोड़ दी, जिससे आवेदकों को यह बताना पड़ रहा है कि उनके माता-पिता या दादा-दादी 2002 में कहां थे। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बदलाव वैधानिक रूप से गलत है और अन्य चुनाव आयुक्तों ने भी इस पर आपत्ति जताई थी।
वोटर लिस्ट में नाम हटाने के मुद्दे पर बात करते हुए भूषण ने बताया कि दिल्ली में करीब 47 लाख नाम हटाए गए, जिनमें से 32 लाख लोगों को 'शिफ्टेड' बताया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों को फॉर्म 8 (जो शिफ्ट होने वालों के लिए होता है) के बजाय फॉर्म 6 भरने को कहा गया, जिसमें यह घोषणा करनी होती है कि व्यक्ति ने पहले कभी वोट नहीं दिया। यह प्रभावी रूप से लाखों लोगों को झूठी घोषणा करने के लिए मजबूर करने जैसा है।
अंत में, उन्होंने सॉफ्टवेयर के जरिए मतदाताओं को हटाने की प्रक्रिया पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बात का अवलोकन किया है कि एक ऐसा एल्गोरिदम विकसित किया गया प्रतीत होता है, जो यांत्रिक रूप से मतदाताओं को बाहर कर रहा है, जिससे किसी खास वर्ग के नागरिकों को निशाना बनाने की आशंका बढ़ जाती है।