एशियाई पैरा गेम्स: दो गोल्ड जीतने वाले प्रणव सूरमा ने दादा को समर्पित की जीत, कहा- उनके आशीर्वाद से मिला यह मुकाम

एशियाई पैरा गेम्स में दो गोल्ड जीतने वाले प्रणव सूरमा ने अपनी जीत अपने दिवंगत दादा को समर्पित की। जानें अन्य विजेताओं की कहानी।

Kittu Kumari26 October 20262 min read0 viewsNational
एशियाई पैरा गेम्स: दो गोल्ड जीतने वाले प्रणव सूरमा ने दादा को समर्पित की जीत, कहा- उनके आशीर्वाद से मिला यह मुकाम

एशियाई पैरा गेम्स 2026 में भारत का नाम रोशन कर लौटे पैरा-एथलीट प्रणव सूरमा की आंखों में खुशी और भावुकता दोनों थी। दो स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाने वाले प्रणव जब सोमवार को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे पहुंचे, तो वहां ढोल-नगाड़ों और परिवार के सदस्यों के साथ उनका जोरदार स्वागत किया गया। इस शानदार स्वागत और देश में पैरा-स्पोर्ट्स के प्रति बढ़ती पहचान को देखकर प्रणव बेहद गदगद नजर आए।

अपनी इस बड़ी उपलब्धि पर बात करते हुए प्रणव ने एक भावुक खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उनके दादाजी का हाल ही में निधन हो गया है और वह अपनी यह सफलता उन्हें ही समर्पित करना चाहते हैं। प्रणव ने कहा, "मैं ये दोनों गोल्ड मेडल अपने दादाजी को समर्पित करता हूं, जिन्होंने कुछ दिन पहले ही दुनिया को अलविदा कहा। मैं आज जिस मुकाम पर पहुंचा हूं, वह पूरी तरह से उनके प्यार और आशीर्वाद का नतीजा है।" उन्होंने देशवासियों का भी शुक्रिया अदा किया और कहा कि ये पदक पूरे राष्ट्र के हैं।

अन्य विजेताओं की खुशी और भारत का बढ़ता कद

केवल प्रणव ही नहीं, बल्कि अन्य पदक विजेताओं के चेहरे भी खुशी से खिले हुए थे। सिल्वर मेडल जीतने वाले प्रदीप कुमार ने अपनी सफलता का श्रेय अपने गांव के लोगों की प्रार्थनाओं और माता मनसा देवी के आशीर्वाद को दिया। प्रदीप के लिए यह एशियाई खेलों में दूसरी बार पदक जीतने का गौरव था। वहीं, पैरा स्विमर तेजस नंदकुमार ने ब्रोंज मेडल जीतकर अपनी मेहनत को सार्थक किया। तेजस ने बताया कि पिछले संस्करण में वह छठे स्थान पर रहे थे, लेकिन इस बार तीसरे स्थान पर आकर उन्होंने अपनी रैंकिंग में बड़ा सुधार किया है।

भारतीय दल के शेफ डी मिशन राहुल स्वामी ने भारत के चौथे स्थान पर रहने को देश की बढ़ती खेल शक्ति का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि भारत अब पैरा-स्पोर्ट्स में दुनिया के दिग्गज देशों की श्रेणी में शामिल हो चुका है। राहुल स्वामी ने यह भी जिक्र किया कि इस बार आयोजन स्थलों और ठहरने की जगहों के अलग-अलग होने के कारण काफी लॉजिस्टिक चुनौतियां थीं, लेकिन कोच और एथलीटों की कड़ी मेहनत ने इन मुश्किलों को मात दी और भारत ने अब तक के सबसे अधिक पदक जीते। अब टीम का पूरा ध्यान आगामी पैरालंपिक खेलों पर है।

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