‘अमित शाह को बोलना पड़ा मजबूर’: कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी का बड़ा दावा

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया है कि लंबे समय तक चुप्पी साधे रखने के बाद अब अमित शाह बोलने के लिए मजबूर हो गए हैं। तिवारी का यह बयान गृह मंत्री के उस दावे के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) का विरोध करने वाले विपक्षी दल वास्तव में अवैध घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रमोद तिवारी ने इसे कांग्रेस की बढ़ती ताकत और उसकी वापसी का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब फिर से मजबूती से उभर रही है और इसका प्रमाण चार राज्यों में पार्टी की स्थिति है। तिवारी ने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने 1985 में भाजपा के सांसदों को संसद में देखा था, तब उत्तर प्रदेश विधानसभा में उनकी संख्या दो अंकों तक भी नहीं पहुंच पाई थी। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा कि जब उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में चुनाव होंगे, तो वहां कांग्रेस के नेतृत्व में तिरंगा लहराएगा।
जंतर मंतर विरोध प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई
राजनीतिक बयानबाजी के बीच दिल्ली के जंतर मंतर इलाके में हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर भी तनाव देखा गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने तीन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, इन कार्यकर्ताओं ने सार्वजनिक शांति भंग करने, कानून का उल्लंघन करने और सोशल मीडिया के जरिए दूसरों को उकसाने की कोशिश की।
पुलिस कार्रवाई में सौरव दास और आशुतोष रंका को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि अजिंक्य शिंदे को छह महीने तक शांति बनाए रखने के लिए पाबंद किया गया है। पुलिस का आरोप है कि 13 अक्टूबर की सुबह इन कार्यकर्ताओं ने निजी परिसर के जरिए प्रतिबंधित जंतर मंतर विरोध स्थल में प्रवेश करने की कोशिश की और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डाली। इस मामले में कनॉट प्लेस और पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में दो अलग-अलग FIR दर्ज की गई हैं।
वहीं, इस कार्रवाई पर CJP सदस्य अभिजीत दिपके ने नाराजगी जताई है। उन्होंने सवाल उठाया कि देश में तिरंगा फहराना इतना बड़ा गुनाह कब से हो गया कि लोगों को पांच दिन की जेल में डाल दिया जाए। उन्होंने सरकार पर 'अनौपचारिक आपातकाल' थोपने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने स्पष्ट किया है कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक यह आंदोलन जारी रहेगा, जैसा कि राहुल गांधी ने भी संकेत दिया है।