जर्मन नागरिक पूनम जेज़लर की रिमांड बढ़ी, 60 लाख की धोखाधड़ी का है आरोप

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने जर्मन नागरिक पूनम जेज़लर की पुलिस हिरासत को दो दिन और बढ़ा दिया है। पूनम पर एक व्यक्ति को जर्मन नागरिकता दिलाने के नाम पर 60 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने का गंभीर आरोप है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) अनिमेश कुमार ने शुक्रवार को सुनवाई के बाद उनकी हिरासत 18 अक्टूबर तक बढ़ाने का आदेश दिया।
पूनम जेज़लर भारतीय मूल की जर्मन नागरिक हैं और अपने पति के साथ स्विट्जरलैंड में रहती हैं। उन्हें दिल्ली पुलिस ने लुक आउट सर्कुलर (LOC) के आधार पर 13 अक्टूबर को आईजीआई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था। यह पूरा मामला वसंत कुंज पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है। आरोप है कि पूनम ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर एक बड़ी साजिश रची और प्रान्जल कुमार नामक व्यक्ति को स्थायी निवास या जर्मन नागरिकता दिलाने का झांसा दिया।
पैसे के लेन-देन और साजिश की होगी जांच
जांच अधिकारी (IO) ने कोर्ट को बताया कि आरोपी ने प्रान्जल कुमार को झांसे में लेकर उनके बैंक खातों से 60 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए। पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच करना चाहती है कि यह पैसा कहां-कहां गया, किसे ट्रांसफर हुआ और इसका अंतिम उपयोग कैसे किया गया। इसके अलावा, स्विट्जरलैंड की एक कंपनी 'ZU-AG' के नाम पर जारी किए गए इनवॉइस की सच्चाई भी जांची जाएगी।
पुलिस इस बात की भी पुष्टि करना चाहती है कि क्या वास्तव में शिकायतकर्ता की ओर से जर्मन नागरिकता के लिए कोई आवेदन किया गया था या यह सब केवल कागजी खेल था। साथ ही, जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि आरोपी ने छह महीने में नागरिकता दिलाने का दावा कैसे किया और रजत अरोड़ा नामक व्यक्ति को जर्मन दूतावास के अधिकारी के रूप में कैसे पेश किया गया।
पूनम जेज़लर ने दावा किया था कि उनके पिता मध्य प्रदेश के पूर्व कानून सचिव थे। हालांकि, उनकी जमानत याचिका को 14 अक्टूबर को वापस ले लिया गया। फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क में शामिल अन्य सहयोगियों की पहचान करने और उनकी भूमिका स्पष्ट करने में जुटी है।