60 लाख की ठगी: कोर्ट ने बढ़ाई पूनम जेज़लर की पुलिस हिरासत, जर्मन नागरिकता के नाम पर लगाया आरोप

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 60 लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले में आरोपी पूनम जेज़लर की पुलिस हिरासत को दो दिन और बढ़ा दिया है। अब वह 18 अक्टूबर 2026 तक पुलिस की गिरफ्त में रहेगी। पूनम जेज़लर, जो मूल रूप से भारतीय मूल की जर्मन नागरिक है और स्विट्जरलैंड में 'वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' की अध्यक्ष है, को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अनिमेष कुमार के सामने पेश किया गया।
यह पूरा मामला एक बड़े आपराधिक षड़यंत्र से जुड़ा है। पूनम जेज़लर को 13 अक्टूबर 2026 को इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। उसके खिलाफ वसंत कुंज पुलिस स्टेशन में साल 2025 में एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी और उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी किया गया था।
जर्मन नागरिकता का झांसा देकर लूटे लाखों रुपये
इस मामले की शुरुआत प्रान्जल कुमार नाम के एक व्यक्ति की शिकायत से हुई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पूनम जेज़लर ने उसे जर्मन नागरिकता या वहां की स्थायी रेजिडेंसी (PR) दिलाने का लालच दिया। इसी झांसे में आकर प्रान्जल ने पूनम को करीब 60 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए, लेकिन बाद में उसे पता चला कि उसके साथ ठगी हुई है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस रकम के लेन-देन की पूरी कड़ियाँ जोड़ने के लिए और समय चाहिए। पुलिस यह पता लगाना चाहती है कि 60 लाख रुपये कहाँ से आए, कैसे ट्रांसफर हुए और अंततः इनका इस्तेमाल कहाँ किया गया। इसके अलावा, जांच टीम स्विट्जरलैंड की एक संस्था 'ZU-AG' के नाम से जारी किए गए इनवॉइस की भी बारीकी से जांच कर रही है।
पुलिस इस बात की भी तफ्तीश कर रही है कि इस खेल में और कौन-कौन शामिल था। जांच के दायरे में रजत अरोड़ा नाम का एक व्यक्ति भी है, जो कथित तौर पर जर्मन दूतावास में काम करता था और पूनम ने ही उसका परिचय शिकायतकर्ता से कराया था। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ठगी की इस रकम का फायदा उठाने वाले अन्य लोग कौन हैं।