पुलिस सुधारों पर इंडिया हैबिटेट सेंटर में मंथन, विशेषज्ञों ने बताया आगे की राह

देश की कानून व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर (IHC) में एक खास चर्चा आयोजित की गई। 'पुलिस रिफॉर्म्स - द रोड अहेड' शीर्षक वाले इस पैनल डिस्कशन में कानूनी दिग्गजों, पूर्व प्रशासकों और मीडिया विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारत के पुलिसिंग ढांचे को मजबूत करने के लिए एक परिवर्तनकारी ब्लूप्रिंट तैयार करना था।
चर्चा के दौरान पूर्व डीजीपी और बीएसएफ के पूर्व महानिदेशक प्रकाश सिंह ने पुलिसिंग में राजनीतिक हस्तक्षेप पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर पुलिस को राजनीतिक दबाव से मुक्त रखकर उन्हें ऑपरेशनल ऑटोनॉमी (परिचालन स्वायत्तता) दी जाती है, तभी एक निष्पक्ष और जनता के अनुकूल पुलिस व्यवस्था का निर्माण संभव है।
प्रणालीगत बदलाव और आधुनिक चुनौतियों पर जोर
पैनल में शामिल पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल डॉ. किरण बेदी ने पुलिसिंग के मानवीय पहलुओं पर बात की। उन्होंने कहा कि संस्थागत पारदर्शिता और कड़े प्रशिक्षण के जरिए पुलिस और जनता के बीच विश्वास की कमी को दूर किया जा सकता है। उन्होंने आधुनिक उपकरणों के उपयोग और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ाने की वकाल रही।
वहीं, प्रसार भारती के पूर्व अध्यक्ष डॉ. ए. सूर्या प्रकाश ने डिजिटल युग की चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में पुलिस को साइबर अपराधों से निपटने, सोशल मीडिया मैनेजमेंट और डेटा एनालिटिक्स के प्रभावी उपयोग के लिए खुद को अपडेट करना होगा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस पूनम ए. बंबा ने स्पष्ट किया कि पुलिस सुधारों का सीधा संबंध न्यायिक दक्षता से है। उन्होंने तर्क दिया कि कानून के ढांचे को बुनियादी मानवाधिकारों के अनुरूप होना चाहिए, क्योंकि पारदर्शिता ही नागरिक विश्वास की बुनियाद है। कार्यक्रम का समापन इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) के.जी. सुरेश के संबोधन के साथ हुआ।