रेप केस में PMCH मेडिकल छात्र को झटका, दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज की अग्रिम जमानत

दिल्ली हाई कोर्ट ने पटना मेडिकल कॉलेज के छात्र की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने आरोपी की कस्टोडियल पूछताछ को जरूरी बताया।

Kittu Kumari31 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
रेप केस में PMCH मेडिकल छात्र को झटका, दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज की अग्रिम जमानत

दिल्ली हाई कोर्ट ने पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (PMCH) के एक मेडिकल छात्र को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में आरोपी छात्र अक्षय आदित्य की अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। जस्टिस सचिन दत्ता की बेंच ने न केवल जमानत याचिका ठुकराई, बल्कि अगस्त 2026 में दी गई अंतरिम सुरक्षा को भी वापस ले लिया है, जिसका मतलब है कि अब पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है।

यह पूरा मामला इंस्टाग्राम से शुरू हुआ था। आरोप है कि नवंबर 2025 में अक्षय आदित्य की मुलाकात पीड़िता से इंस्टाग्राम के जरिए हुई थी। शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने पीड़िता को शादी का झांसा दिया और विश्वास दिलाया कि वह दोनों परिवारों की सहमति से उनसे शादी करेगा। इसी भरोसे के चलते पीड़िता उसके संपर्क में रही, लेकिन बाद में आरोप लगा कि उसने शादी का वादा कर उसके साथ यौन शोषण किया।

दो अलग-अलग मौकों पर शोषण के गंभीर आरोप

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मामले की गंभीरता इस बात से पता चलती है कि आरोपी पर दो अलग-अलग मौकों पर जबरन शारीरिक संबंध बनाने के आरोप हैं। पहली घटना दिसंबर 2025 में गाजियाबाद के वैशाली स्थित एक होटल में हुई, जहां पीड़िता ने आरोपी के रुकने के लिए कमरा बुक किया था। आरोप है कि वहां अक्षय ने उसकी इच्छा के विरुद्ध जबरदस्ती की।

दूसरी घटना मार्च 2026 की है, जब आरोपी ने दिल्ली के सुंदर नर्सरी में पीड़िता से मुलाकात की। आरोप है कि वह उसे अपने दोस्तों से मिलवाने के बहाने एक सुनसान घर में ले गया और वहां उसके साथ दोबारा दुष्कर्म किया। पीड़िता का यह भी दावा है कि आरोपी ने उसे डराने के लिए अपना सिर दीवार पर मारा और धमकी दी कि अगर उसने किसी को बताया तो वह खुदकुशी कर लेगा। इतना ही नहीं, उसने पीड़िता का फोन भी छीन लिया ताकि वह अपने परिवार से संपर्क न कर सके।

कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि जांच अभी अधूरी है और आरोपी की कस्टोडियल पूछताछ बेहद जरूरी है। जस्टिस दत्ता ने कहा कि यह कोई 'असाधारण मामला' नहीं है जिसमें अग्रिम जमानत जैसी बड़ी राहत दी जाए। कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और होटल रिकॉर्ड्स का हवाला देते हुए कहा कि आरोपी के बयानों में विसंगतियां हैं और उसने इंस्टाग्राम चैट डिलीट कर दी थी, जो मामले को और संदिग्ध बनाता है।

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