PM मोदी ने किया ESTIC 2026 का उद्घाटन, वैज्ञानिकों से 3 साल में ठोस नतीजे देने की अपील

पीएम मोदी ने भारत मंडपम में ESTIC 2026 का आगाज किया और वैज्ञानिकों से 3 साल में ठोस नतीजे देने की अपील की।

Kittu Kumari28 October 20262 min read0 viewsNational
PM मोदी ने किया ESTIC 2026 का उद्घाटन, वैज्ञानिकों से 3 साल में ठोस नतीजे देने की अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में 'इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव' (ESTIC) 2026 का शानदार आगाज किया है। इस बड़े आयोजन में पीएम मोदी ने देश के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और डीप-टेक स्टार्टअप्स को एक खास चुनौती दी है। उन्होंने आह्वान किया कि लैब में होने वाले शोध केवल कागजों या प्रयोगों तक सीमित न रहें, बल्कि अगले तीन वर्षों के भीतर उन्हें ऐसे तकनीकी परिणामों में बदला जाए जिन्हें मापा जा सके और जिनका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सके।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि वैज्ञानिक खोजों का असली मकसद असल दुनिया की समस्याओं को हल करना होना चाहिए। उन्होंने 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन को दोहराते हुए कहा कि तकनीक ऐसी हो जो देश की आत्मनिर्भरता को मजबूत करे और मानव कल्याण में योगदान दे। भारत अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मैटेरियल्स और बायोटेक्नोलॉजी जैसे आधुनिक क्षेत्रों में वैश्विक मानक स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

स्टार्टअप इकोसिस्टम में आई बड़ी तेजी

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इस कॉन्क्लेव के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भारत की बदलती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं रहा, बल्कि दुनिया के लिए भविष्य के वैज्ञानिक समाधान तैयार करने वाला 'को-क्रिएटर' बन गया है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि साल 2014 में जहां देश में केवल 400 स्टार्टअप्स थे, वहीं आज यह संख्या बढ़कर 2.3 लाख से ज्यादा हो गई है। सबसे खास बात यह है कि इनमें से 50 से 60 प्रतिशत स्टार्टअप्स टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि तकनीकी उद्यमिता अब छोटे शहरों तक पहुंच चुकी है।

कार्यक्रम की अन्य मुख्य बातें इस प्रकार रहीं:

  • वैश्विक भागीदारी: इस कॉन्क्लेव में दुनिया भर के 5,000 से ज्यादा प्रतिनिधि, नीति निर्माता और वैज्ञानिक शामिल हुए।
  • विशेषज्ञों का मार्गदर्शन: कार्यक्रम में दो नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने अपने विचार साझा किए, जिनमें कोलंबिया यूनिवर्सिटी के जोआचिम फ्रैंक ने ड्रग डिजाइन और क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी पर चर्चा की।
  • प्राथमिकता वाले क्षेत्र: भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार अजय के सूद ने क्वांटम कम्युनिकेशन, जेनेरेटिव एआई, सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन और डीप ओशन मिशन जैसे 12 मुख्य प्राथमिकता क्षेत्रों की पहचान की।

कुल मिलाकर, यह कॉन्क्लेव बुनियादी शोध को औद्योगिक स्तर पर ले जाने और भारत की संप्रभु राष्ट्रीय क्षमताओं को विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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