दिल्ली में डीटीसी बस हड़ताल के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल, तुरंत बस सेवा बहाल करने की मांग

दिल्ली में डीटीसी बस चालकों, कंडक्टरों और अन्य कर्मचारियों की हड़ताल के कारण जनता को हो रही भारी परेशानी को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। इस याचिका में अधिकारियों से राष्ट्रीय राजधानी में डीटीसी और सार्वजनिक बस सेवाओं को तुरंत बहाल करने तथा उनकी सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है। यह याचिका एक प्रैक्टिसिंग वकील और नियमित डीटीसी यात्री अमी सिसोदिया द्वारा दिल्ली सरकार, परिवहन विभाग, डीटीसी और गृह विभाग के खिलाफ दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए कहा है कि बस सेवाओं के लगातार बाधित होने से उन लाखों यात्रियों को रोजाना भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है जो सस्ते सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर हैं।
याचिका के अनुसार, इस व्यवधान से विशेष रूप से उन महिला यात्रियों पर असर पड़ा है जो दिल्ली सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली मुफ्त बस यात्रा सुविधा का लाभ उठाती थीं। याचिका में कहा गया है कि बसें बंद होने के कारण याचिकाकर्ता और अन्य महिलाओं को महंगे वैकल्पिक साधनों का उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यह समस्या केवल याचिकाकर्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे दिल्ली की एक बहुत बड़ी आबादी प्रभावित हो रही है। इस प्रभावित आबादी में छात्र, दैनिक वेतन भोगी, नौकरीपेशा लोग, वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांगजन, मरीज और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग शामिल हैं जो सस्ते सार्वजनिक परिवहन पर पूरी तरह निर्भर हैं।
याचिकाकर्ता ने डीटीसी बेड़े के बड़े पैमाने पर ठप होने, हजारों चालकों के हड़ताल में शामिल होने और यात्रियों के सड़क पर फंसने या महंगे साधनों का उपयोग करने की खबरों का हवाला दिया है। इस व्यवधान के कारण दिल्ली मेट्रो पर भी यात्रियों का अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। याचिका में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि दिल्ली सरकार ने पहले ही डीटीसी और क्लस्टर बस सेवाओं को आवश्यक सेवा रखरखाव ढांचे के तहत एक महत्वपूर्ण परिवहन सेवा के रूप में मान्यता दी है।
याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया है कि वह प्रदर्शनकारियों के वेतन, सेवा शर्तों या औद्योगिक विवादों के समाधान की मांग नहीं कर रही है और न ही चालकों या कंडक्टरों के खिलाफ किसी दंडात्मक कार्रवाई की मांग है। इसके बजाय, याचिका में संबंधित सरकारी और सांविधिक प्राधिकरणों को पर्याप्त बस सेवाओं की बहाली के लिए सभी आवश्यक उपाय करने का निर्देश देने की मांग की गई है। सेवाओं के पूरी तरह बहाल होने तक यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि सार्वजनिक परिवहन का एक न्यूनतम स्तर बना रहे ताकि आम जनता इस विवाद के कारण अनिश्चित काल तक परेशान न हो। यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत जनहित याचिका के रूप में दायर की गई है और मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विक्रांत डबास पैरवी कर रहे हैं।