फिल्म 'सूर्या' की रिलीज पर बवाल, डॉक्टरों ने दिल्ली हाई कोर्ट से लगाई रोक की गुहार

डॉक्टरों ने फिल्म 'सूर्या' में मेडिकल प्रोफेशन को गलत दिखाने और हिंसा के चित्रण के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।

Kittu Kumari28 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
फिल्म 'सूर्या' की रिलीज पर बवाल, डॉक्टरों ने दिल्ली हाई कोर्ट से लगाई रोक की गुहार

आने वाली फिल्म 'सूर्या - अंत से आरंभ तक' (SURYAA – Ant Se Aarambh Tak) विवादों में घिर गई है। डॉक्टरों ने इस फिल्म में चिकित्सा पेशे को गलत तरीके से पेश करने और स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि 20 नवंबर को होने वाली फिल्म की रिलीज पर अंतरिम रोक लगाई जाए और फिल्म की रिलीज से पहले उसकी गहन जांच की जाए।

यह याचिका ऑल इंडिया डॉक्टर्स के लीगल सेल के उपाध्यक्ष डॉ. नचिकेता भाटिया और IMA जूनियर डॉक्टर्स नेटवर्क के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. ध्रुव चौहान द्वारा दाखिल की गई है। याचिका में केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, सेंसर बोर्ड (CBFC) और फिल्म निर्माता MM मूवीज को प्रतिवादी बनाया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि फिल्म के टीजर और ट्रेलर में मेडिकल प्रोफेशन में भ्रष्टाचार को बहुत ही सामान्य और नकारात्मक तरीके से दिखाया गया है।

विवाद की मुख्य वजह और डॉक्टरों की आपत्ति

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याचिका में फिल्म के कुछ संवादों पर कड़ी आपत्ति जताई गई है। डॉक्टरों के अनुसार, फिल्म में मरीजों से 5 लाख रुपये वसूलने और 25 टेस्ट कराने जैसे दृश्यों के साथ-साथ यह लाइन कि "डॉक्टर पर्चे नहीं, कमीशन की पर्ची लिखते हैं", पूरे पेशे की छवि खराब करती है। इसके अलावा, फिल्म के प्रमोशन में इस्तेमाल किए गए शब्दों जैसे "अविश्वसनीय सच्ची घटनाओं से प्रेरित" और "मेडिकल सिस्टम की चौंकाने वाली सच्चाई का पता लगाएं" पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ऐसे दावे दर्शकों को यह विश्वास दिलाएंगे कि फिल्म में दिखाया गया सब कुछ सच है।

सबसे गंभीर चिंता फिल्म में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अस्पताल के कर्मचारियों के खिलाफ शारीरिक हिंसा को 'वीरता' या 'सही' ठहराकर दिखाने को लेकर है। याचिका में कहा गया है कि इस तरह का चित्रण स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है और आपातकालीन सेवाओं व मरीज की देखभाल पर बुरा असर डाल सकता है।

डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि वे स्वास्थ्य प्रणाली की जायज आलोचना के खिलाफ नहीं हैं और न ही वे डॉक्टरों को जवाबदेही से बचाना चाहते हैं। उनकी मांग केवल इतनी है कि विवादित दृश्यों और संवादों की सक्षम अधिकारियों द्वारा जांच की जाए और यदि वे कानून का उल्लंघन करते हैं, तो उनमें बदलाव किया जाए या उन्हें हटा दिया जाए।

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