पूर्वी दिल्ली में अवैध कब्जे और खराब बुनियादी ढांचे से पैदल चलने वाले लोग मजबूर होकर सड़कों पर चलने को हैं विवश

पूर्वी दिल्ली में फुटपाथों पर अवैध कब्जों और खराब रखरखाव के कारण पैदल चलने वालों को गंभीर सुरक्षा जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है। 26 अगस्त 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, सोनिया विहार, सीलमपुर, लक्ष्मी नगर, कड़कड़डूमा, पटपड़गंज और शाहदरा जैसे इलाके इससे काफी प्रभावित हैं। आम बाधाओं में गहरे गड्ढे, मलबा, सड़क किनारे वेंडिंग स्टॉल, व्यावसायिक सामान और अवैध वाहन पार्किंग शामिल हैं। विशेष रूप से सोनिया विहार मेट्रो क्षेत्र के नीचे गहरे गड्ढों को गंभीर खतरों के रूप में उजागर किया गया है। पैदल यात्रियों की सुरक्षा और सुप्रीम कोर्ट का निर्देश 25 अगस्त 2026 को भारत के सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि पैदल चलने वालों का फुटपाथों पर प्राथमिक अधिकार है। अदालत ने आदेश दिया कि नगर निकाय, शहरी विकास प्राधिकरण और पंचायतें इन स्थानों के निर्माण, सीमांकन और रखरखाव के लिए जिम्मेदार हैं, और नागरिकों को इन अधिकारों के उल्लंघन के लिए संवैधानिक उपचार और मुआवजे की मांग करने का अधिकार है। दिल्ली मास्टर प्लान-2021 के अनुसार 12 मीटर से अधिक चौड़ी सड़कों पर न्यूनतम 1.8 मीटर चौड़ाई के निरंतर और अबाधित फुटपाथ होने चाहिए। कानूनी कार्रवाई और प्रशासन की नीतियां इन मुद्दों को हल करने के लिए कानूनी और विनियामक दबाव बढ़ रहा है। इससे पहले, दिल्ली उच्च न्यायालय ने संबंधित एजेंसियों और दिल्ली पुलिस को सार्वजनिक मार्गों से बाधाओं को हटाने के लिए अपनी शक्तियों का उपयोग करने का निर्देश दिया था। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त निगरानी समिति की जनवरी 2025 की रिपोर्ट में सार्वजनिक पार्कों और स्थानों में लगातार अवैध पार्किंग और अतिक्रमण की पहचान की गई थी। अनधिकृत भूमि उपयोग को रोकने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने जुलाई 2026 में एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) शुरू की, जिसके तहत ड्रोन निगरानी और जियो-टैगिंग का उपयोग करके अवैध कब्जे के 72 घंटे के भीतर विध्वंस का आदेश दिया गया है। प्रशासनिक नीतियां और क्षेत्रीय अभियान अतिक्रमण के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत दो साल की जेल की सजा, बैंक खाते सील करना और आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत कानूनी कार्रवाई शामिल है। भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने वाले अधिकारियों की पेंशन रोकने की भी अनुमति है। हालांकि लोक निर्माण विभाग (PWD), नगर निगमों और पुलिस के बीच आपसी तालमेल की कमी एक बड़ी बाधा बनी हुई है। इस बीच, सार्वजनिक रास्तों को खाली कराने के लिए क्षेत्रीय प्रयास जारी हैं, जिसके तहत 24 अगस्त 2026 को गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) ने 16 किलोमीटर के दायरे में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया।