पैदल चलने वालों की सुरक्षा: सुप्रीम कोर्ट ने फुटपाथ के इस्तेमाल को बताया मौलिक अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने फुटपाथ पर चलने को मौलिक अधिकार बताया है। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में सुरक्षा सुधार के लिए उठाए जा रहे कदम।

भारत के बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में पैदल चलना आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। टूटे हुए फुटपाथ और असुरक्षित क्रॉसिंग की वजह से लोग पैदल चलने से कतराते हैं, जिसका सीधा असर ट्रैफिक जाम और बढ़ते प्रदूषण पर पड़ता है। हालांकि, अब इस दिशा में एक बड़ा बदलाव दिख रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में यह स्पष्ट कर दिया है कि demarcated और अच्छी तरह से रखरखाव किए गए फुटपाथों पर चलने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि स्थानीय प्रशासन अब मोटर वाहनों के बजाय पैदल चलने वालों की बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता दे।
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब नागरिक नगर निकायों की लापरवाही के खिलाफ कानूनी रास्ता अपना सकते हैं। अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की दर दुनिया में सबसे अधिक है। इनमें से करीब आधे मामले पैदल चलने वालों, साइकिल सवारों और मोटरसाइकिल चालकों के होते हैं, जो सड़क पर सबसे अधिक असुरक्षित होते हैं।
शहरों में सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदम
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और बढ़ती जरूरतों के बाद अब महानगरों में विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं:
- मुंबई: बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने 'Pedestrian First' कैंपेन शुरू किया है। इसके तहत अस्पतालों और ट्रांसपोर्ट हब के पास के फुटपाथों से हजारों अतिक्रमण हटाए गए हैं।
- बेंगलुरु: यहाँ 'Safe Footpath' और 'BWCC1000K' जैसे अभियान चलाकर अवैध पार्किंग और कियोस्क को हटाया जा रहा है। साथ ही 'बेंगलुरु डिजाइन: ओपन कॉल' के जरिए आम जनता से सुझाव मांगे जा रहे हैं।
- दिल्ली: दिल्ली अपने 'मास्टर प्लान 2047' में पैदल यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। इसमें 'शैडो रोड्स' बनाने की योजना है ताकि लोग ग्रीन स्पेस के जरिए अपने दफ्तर तक पैदल जा सकें। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली प्रशासन को मथुरा रोड क्रॉसिंग पर सुरक्षा सुधार का काम 25 नवंबर 2026 तक पूरा करने का निर्देश दिया है।
केंद्र स्तर पर भी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय अब वाहन-केंद्रित प्लानिंग से हटकर लोगों की सुरक्षा पर ध्यान दे रहा है। 'नई दिल्ली रोड सेफ्टी डिक्लेरेशन' के तहत सरकार का लक्ष्य 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली गंभीर चोटों और मौतों को 50% तक कम करना है।