PCI का बड़ा फैसला: B.Pharm कोर्स में AI और Python अनिवार्य, अब इंडस्ट्री से जुड़ेंगे छात्र
फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया ने पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव किए हैं। अब B.Pharm छात्रों के लिए AI, ML और कंपनियों के साथ MOU अनिवार्य होंगे।

नई दिल्ली के होटल द ग्रैंड में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने फार्मेसी शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए बड़े बदलावों का ऐलान किया है। 28 अक्टूबर 2026 को हुई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य क्लासरूम में पढ़ाई जाने वाली थ्योरी और इंडस्ट्री की वास्तविक जरूरतों के बीच के अंतर को खत्म करना है। फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया रिफॉर्म्स के तहत अब छात्रों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें सीधे इंडस्ट्री के माहौल से जोड़ा जाएगा।
डॉ. मोंतुकुमार पटेल के नेतृत्व में PCI ने एक 'अकादमिक इंडस्ट्री एडवाइजरी कमेटी' बनाई है, जिसमें 50 बड़े उद्योगपतियों को शामिल किया गया है। इस पहल का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि फार्मेसी की पढ़ाई आज के दौर की प्रोफेशनल जरूरतों के हिसाब से हो। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब हर बैचलर ऑफ फार्मेसी (B.Pharm) संस्थान के लिए कम से कम 10 फार्मा कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) करना अनिवार्य होगा, ताकि छात्रों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के भरपूर मौके मिल सकें।
पाठ्यक्रम में AI और मशीन लर्निंग की एंट्री
बदलते समय के साथ तकनीक को अपनाने के लिए PCI ने पाठ्यक्रम में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। अब फार्मेसी के कोर्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML) और पायथन (Python) जैसे विषयों को अनिवार्य रूप से जोड़ा जाएगा। इन बदलावों का सीधा असर छात्रों की एम्प्लॉयबिलिटी पर पड़ेगा, जिससे उन्हें नौकरी मिलने में आसानी होगी।
PCI के उपाध्यक्ष जे.एच. चौधरी ने बताया कि इस बदलाव के साथ-साथ काउंसिल अपने इतिहास में पहली बार एक राष्ट्रीय स्तर का सम्मान कार्यक्रम भी शुरू कर रही है। इसके तहत उन शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक की सेवा दी है। प्रोफेसर इंदु पाल कौर और प्रोफेसर पद्मा वी. देवराजन जैसे दिग्गजों ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि इससे भारत की "दुनिया की फार्मेसी" वाली छवि और मजबूत होगी।
इस पूरी कवायद के पीछे चार मुख्य लक्ष्य रखे गए हैं: आधुनिक इंडस्ट्री की जरूरतों के हिसाब से सिलेबस को अपडेट करना, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग को बढ़ावा देना, संस्थानों में इनोवेशन लाना और फार्मेसी ग्रेजुएट्स की नौकरी की संभावनाओं को बढ़ाना।