जामिया मिलिया इस्लामिया का 'शटडाउन', पवन खेड़ा बोले- यह संवाद नहीं बल्कि दमन है
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने जामिया मिलिया इस्लामिया के लंबे शटडाउन को 'दमन' बताया और बीजेपी सरकार पर युवाओं की आवाज दबाने का आरोप लगाया।

जामिया मिलिया इस्लामिया कैंपस में जारी तनाव और यूनिवर्सिटी के लंबे समय तक बंद रहने के फैसले पर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस स्थिति को लेकर केंद्र सरकार और यूनिवर्सिटी प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब छात्र अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग करते हैं, तो सरकार का जवाब संवाद के बजाय दमन के रूप में आता है।
पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि भारत पिछले कई महीनों से जिस 'अघोषित आपातकाल' के दौर से गुजर रहा है, उसने अब जामिया मिलिया इस्लामिया में एक औपचारिक रूप ले लिया है। उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि यूनिवर्सिटी को प्रभावी रूप से 13 जनवरी तक बंद रखा गया है, जो कि आज से लगभग 78 दिनों का समय है।
छात्रों के अधिकारों पर छिड़ी बहस
कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि आखिर छात्रों ने ऐसा क्या अपराध किया है जिसके कारण उन पर इतने कड़े प्रतिबंध लगाए गए। उन्होंने तर्क दिया कि छात्र केवल संविधान के अनुच्छेद 19(1)(c) के तहत अपने मौलिक अधिकार की मांग कर रहे हैं, जिसके तहत उन्हें संघ और निर्वाचित छात्र संघ बनाने का हक है। खेड़ा ने आरोप लगाया कि यह बीजेपी का असहमति के प्रति डर और युवाओं के प्रति उसकी शत्रुता को दर्शाता है।
दूसरी ओर, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ऑनलाइन कक्षाएं 24 नवंबर तक चलेंगी और इसी तारीख को विषम सेमेस्टर (odd-semester) की पढ़ाई पूरी होगी। इसके बाद 25 से 30 नवंबर तक प्रैक्टिकल और प्रोजेक्ट वाइवा ऑनलाइन होंगे, जबकि 1 दिसंबर से 24 दिसंबर तक ऑनलाइन थ्योरी परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। यूनिवर्सिटी में शीतकालीन अवकाश 25 दिसंबर से 12 जनवरी तक रहेगा और भौतिक कक्षाएं 13 जनवरी 2027 से शुरू होंगी।
इस पूरे मामले पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रहलाद जोशी ने अलग रुख अपनाया है। उन्होंने कैंपस में हुई हिंसा, तोड़फोड़ और पत्थरबाजी की कड़ी निंदा करते हुए इसमें शामिल लोगों को 'गुंडा' करार दिया। उन्होंने कहा कि छात्र संघ चुनावों का मुद्दा 2006 से लंबित है, लेकिन हिंसा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि छात्रों की चिंताओं और अनुशासनात्मक कार्रवाइयों की जांच के लिए वरिष्ठ डीन और प्रोफेसरों की एक सात सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है।
गौरतलब है कि जामिया कैंपस में तनाव तब बढ़ा जब छात्र संघ की बहाली और चुनाव के लिए समयसीमा तय करने की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू हुए। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को कैंपस के कुछ हिस्सों को खाली करने की चेतावनी दी है, हालांकि यह भी घोषणा की गई है कि संघ के संविधान की मंजूरी के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे।