पवन खेड़ा ने आरके सिंह के एसआईआर चिंताओं का हवाला दिया, चुनाव आयोग में विश्वास बहाल करने के लिए सीईसी के इस्तीफे की मांग की

नयी दिल्ली। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने मंगलवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व गृह सचिव राज कुमार सिंह की ओर से मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर पर उठाए गए गंभीर सवालों का हवाला दिया। खेड़ा ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया चुनावी कानून, मतदाताओं के मताधिकार से वंचित करने और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर गंभीर चिंताएं पैदा करती है। एक्स पर साझा किए गए एक पोस्ट में पवन खेड़ा ने कहा कि सिंह व्यवस्था को अंदर से अच्छी तरह जानते हैं। खेड़ा के अनुसार, आरके सिंह ने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के लिए खतरा, चुनावी कानून का उल्लंघन, चुनावी शक्तियों का केंद्रीयकरण, प्राकृतिक न्याय से इनकार और गरीबों के खिलाफ तकनीकी मानदंडों के इस्तेमाल जैसे कई गंभीर मुद्दे उठाए हैं।
आरके सिंह का खुला खत और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप
आरके सिंह ने अपने खुले खत में लिखा कि क्या भारत को लोकतंत्र बनाए रखना है, तो आपको यह समझना होगा कि मुख्य चुनाव आयुक्त यानी सीईसी ज्ञानेंद्र कुमार और उनके अधिकारी तथाकथित एसआईआर में क्या कर रहे हैं। सिंह के मुताबिक, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के तहत विशेष संशोधन केवल विशेष मामलों में और लिखित कारणों से ही किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के जरिए अब तक 13 करोड़ नाम हटाए गए हैं। आरके सिंह ने सुझाव दिया कि सभी विपक्षी दलों को तब तक चुनाव में हिस्सा लेने से इनकार कर देना चाहिए जब तक कि सीईसी और चुनाव आयुक्तों का इस्तीफा नहीं हो जाता।
जयराम रमेश की समिति पर टिप्पणी और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया
अलग से, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने गृह मंत्रालय के नेतृत्व वाली जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर उच्च स्तरीय समिति को पूर्वाग्रहों से ग्रसित और एक खतरनाक एजेंडे वाला पैनल करार दिया। एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए जयराम रमेश ने यह बात कही। द इंडियन एक्सप्रेस की एक खोजी रिपोर्ट के बाद राजनीतिक विवाद और बढ़ गया, जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर दस महीनों में कम से कम 14 बार आपत्तियां उठाई थीं। वहीं, चुनाव आयोग ने इस बात से इनकार किया है कि दर्ज आपत्तियां कोई संस्थागत असंतोष थीं और कहा कि एसआईआर से जुड़े फैसले आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए थे।