बीकानेर हाउस में तस्वीरों को हटाने पर बवाल, पवन खेड़ा ने BJP पर लगाया 'दोहरे मापदंड' का आरोप

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने बीकानेर हाउस में रायहन वाड्रा की तस्वीरों को हटाने पर भाजपा और सरकार के दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाए हैं।

Kittu Kumari25 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
बीकानेर हाउस में तस्वीरों को हटाने पर बवाल, पवन खेड़ा ने BJP पर लगाया 'दोहरे मापदंड' का आरोप

दिल्ली के बीकानेर हाउस में आयोजित एक आर्ट प्रदर्शनी को लेकर सियासी घमासान मच गया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने बीकानेर हाउस प्रशासन और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे 'स्टेट सेंसरशिप' करार दिया है। यह पूरा विवाद कलाकार रायहन राजीव वाड्रा की सोलो प्रदर्शनी "नो आइडिया इज फाइनल" से जुड़ा है, जिसमें से कई तस्वीरों को हटाने के लिए कहा गया था।

दरअसल, रायहन वाड्रा (जो कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे हैं) ने दिल्ली में युवाओं द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शनों और नागरिक आंदोलनों की 105 तस्वीरें प्रदर्शित करने की योजना बनाई थी। लेकिन प्रदर्शनी के सार्वजनिक होने से कुछ घंटे पहले ही बीकानेर हाउस प्रशासन ने 75 तस्वीरों को हटाने का निर्देश दे दिया। प्रशासन का तर्क था कि उनकी नीति के अनुसार वहां राजनीतिक सामग्री की अनुमति नहीं है।

'राजनीतिक कला नहीं, उसके पीछे की राजनीति समस्या है'

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इस कार्रवाई पर पलटवार करते हुए पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और भाजपा के मापदंड केवल विरोध प्रदर्शनों के लिए सख्त हैं। खेड़ा ने सितंबर 2025 की एक कलाकृति का जिक्र किया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महात्मा गांधी को एक साथ दिखाया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर राजनीतिक सामग्री प्रतिबंधित है, तो पीएम मोदी की तस्वीर वाली उस कलाकृति को अनुमति कैसे मिली?

पवन खेड़ा ने अपने बयान में कहा, "साफ है कि 'राजनीतिक कला' समस्या नहीं है, बल्कि उसके पीछे की राजनीति समस्या है। अगर कला किसी 'मास्टर' का महिमामंडन करती है, तो उसका स्वागत होता है, लेकिन अगर वह लोकतंत्र, संविधान और नागरिकों के विरोध करने के मौलिक अधिकार का जश्न मनाती है, तो अचानक वह अस्वीकार्य हो जाती है।"

खेड़ा ने आगे कहा कि जब प्रधानमंत्री का चेहरा अनाज के बोरों से लेकर सड़क किनारे के बैनरों तक हर जगह मौजूद है, तो उनका चित्रण अपने आप में एक राजनीतिक बयान बन जाता है। उन्होंने इसे बीकानेर हाउस और सरकार के दोहरे मापदंडों का उदाहरण बताया। वहीं, दूसरी ओर भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार कला प्रदर्शनियों में राजनीतिक सामग्री की अनुमति नहीं दी जा सकती।

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