बीकानेर हाउस में रैयान वाड्रा की तस्वीरों पर विवाद, पवन खेड़ा ने सरकार को घेरा
बीकानेर हाउस में रैयान वाड्रा की तस्वीरों को हटाने पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।

दिल्ली के बीकानेर हाउस में आयोजित एक आर्ट एग्जीबिशन को लेकर सियासी घमासान मच गया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने रैयान वाड्रा की कलाकृतियों को हटाने के मामले में सरकार के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पवन खेड़ा ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताते हुए पूछा है कि आखिर यह सरकार कला के माध्यम से अपनी बात रखने वाले कलाकारों के खिलाफ क्यों है।
पूरा मामला रैयान वाड्रा (प्रियंका गांधी वाड्रा और रॉबर्ट वाड्रा के बेटे) की प्रदर्शनी 'नो आइडिया इज फाइनल' से जुड़ा है। रैयान का आरोप है कि बीकानेर हाउस प्रबंधन ने उनकी उन तस्वीरों पर आपत्ति जताई, जिनमें दिल्ली के युवाओं के आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों को दिखाया गया था। इतना ही नहीं, प्रबंधन ने उनसे तिरंगे वाली दो तस्वीरों को हटाने के निर्देश दिए थे।
प्रबंधन के रवैये पर रैयान ने उठाए सवाल
रैयान वाड्रा ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि प्रदर्शनी शुरू होने के महज 24 घंटे पहले प्रबंधन ने उनसे संपर्क किया और बताया कि कुछ तस्वीरें उनकी पॉलिसी का उल्लंघन करती हैं। रैयान ने इस बात पर हैरानी जताई कि जब उन्होंने एक हफ्ते पहले ही पूरा लेआउट साझा कर दिया था, तो आपत्ति इतनी देर से क्यों आई।
रैयान के मुताबिक, जब उन्होंने इस देरी पर सवाल किया, तो उन्हें बताया गया कि लेआउट नहीं देखा गया था। उन्होंने कहा कि अंतिम समय में इस तरह के निर्देश देना गलत है और यह कलात्मक स्वतंत्रता को कम करने की कोशिश है।
दूसरी ओर, पवन खेड़ा ने इस घटना को युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार हर दिन ऐसे उदाहरण पेश कर रही है जहां युवाओं को कला या अन्य माध्यमों से अपनी राय व्यक्त करने से रोका जा रहा है। खेड़ा ने स्पष्ट किया कि एक कलाकार को अपनी कृतियों के जरिए खुद को अभिव्यक्त करने का पूरा हक होना चाहिए।